नयी दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) संजीव चतुर्वेदी को उनके पद से हटा दिया गया है। उनका कामकाज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव और सीवीओ को सौंपा गया है।
श्री चतुर्वेदी के तबादले से लगभग तीन महीने पुरानी मोदी सरकार विवादों में आ गई है। आरोप लग रहे हैं कि संजीव चतुर्वेदी को ईमानदारी का फल मिला है। बताया जाता है कि संजीव ने भ्रष्‍टाचार के कई मामलों पर मोर्चा खोल रखा था और उस पर कार्रवाई भी की जा रही थी। खबर है कि अचानक हटाये जाने से नाराज संजीव ने तीन महीने के लिए छुट्टी में जाने के लिए अर्जी दे दी है।
एक निजी समाचार चैनल ने खबर दी है कि संजीव का तबादला एक बड़े भाजपा नेता के नजदीकी डॉक्टर, जिसके खिलाफ संजीव ने कार्रवाई की थी, के कहने पर किया गया है।
इधर इस मामले में नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला शुरू हो गया है। संप्रग सरकार ने घोषणा कि थी कि एम्‍स के सीवीओ को हटाने या दबादला करने के पहले पीएमओ से आदेश लेना होगा। इसका साफ मतलब है कि यह कार्रवाई पीएमओ के संज्ञान में थी। अब सवाल उठाए जा रहे हैं कि न खाऊंगा न खाने दूँगा, का उद्घोष करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां भ्रष्‍टाचार से लड़ने की बात करते हैं वहीं उनकी पार्टी येदियुरुप्पा को सम्मान देती है तो सरकार एक साफ छवि वाले अधिकारी को जबरन हटा देती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक आदेश के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री की मंजूरी के साथ एम्स, नयी दिल्ली के सीवीओ का कामकाज तत्काल प्रभाव से तीन महीने की अवधि के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव और सीवीओ को सौंपने का फैसला किया गया है। हरियाणा कैडर के 2002 बैच के वन सेवा के अधिकारी चतुर्वेदी का कार्यकाल जून, 2016 में पूरा होता।
इस संबंध में बिज़नेस स्टैंडर्ड ने खुलासा किया है कि चतुर्वेदी को हटाए जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आँखों के तारे भाजपा नेता जेपी नड्ढा ने स्वास्थ्य मंत्री को खत लिखा था।
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