नई दिल्ली। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव प्रकाश करात ने कहा है कि मोदी का प्रचार अभियान आक्रमक हिन्दुत्व और बड़े उद्योगिक घरानो द्वारा समर्थन पर टिका है। यह मोदी के के सहारे एक ऐसे नेता की छवि प्रस्तुत करना चाहते हैं जो 'विकास' और 'सुचारू प्रशासन' के लिये सक्षम हो। इसलिये मोदी उद्योगिक घरनो द्वारा वांछित विकास और संप्रदायिक हिन्दुत्व ताकतों का भी प्रचारक है।
माकपा की ओर से जारी एक प्रश्नोत्तर सीरीज में करात ने कहा कि हम देख रहे हैं कि मोदी एक तरफ नौकरियां देने की बात कर रहे हे वहीं दूसरी तरफ वो बंगलादेशियों को देश से बाहर करने की बात करते हैं। साथ ही वह सुचारू प्रशासन की बात करने के साथ-साथ गौ हत्या पर अल्पसंख्यक विरोधी बात करते हैं। इस तरह का पूँजीपति हिन्दुत्व के समावेश वाला रास्ता ही देश को तानाशाह शासन की तरफ ले जाएगा।
भाजपा और मीडिया दोनों की इस घोषणा कि उन्हे पूर्ण बहुमत मिलेगा करात ने कहा कि कॉर्पोरेट मीडिया ने मोदी और भाजपा के स्पष्ट बहुमत की घोषणा की है। इससे याह बात साफ हो जाती है कि मोदी को उद्योगिक घरानों से पूर्ण सहयोग मिल रहा है। इसके कारण चुनाव के वास्तविक घटनाक्रम की धूमिल छवि पेश हो रही है। भाजपा उन इलाको में तो निश्चित तौर पर अज्छा करेगी जहाँ वह कॉंग्रेस के विरोध में सबसे बड़ी ताकत है। पर देश के कई बड़े हिस्सो में कॉंग्रेस विरोधी यह लहर गैर कॉन्ग्रेसी धर्मनिरपेक्ष क्षेत्रीय पार्टियों और वाम मोर्चा को फायदा पहुंचाएगी। इसलिये भाजपा के सम्पूर्ण बहुमत के बात तो केवल एक मिथक है।
कुछ यूपीए नेताओं द्वारा तीसरे मोर्चे को समर्थन की बात पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रकाश करात ने कहा “चुनावों के बीच में कॉंग्रेस के नेताओं को यह भरोसा हो गया था कि वे एक हारी हुई जंग लड़ रहे हैं। तीसरे मोर्चे को समर्थन की बात इसी आभास का हिस्सा है। भाजपा और मोदी के कारण उभरे भय के बाद कॉंग्रेस के पास गैर कॉंग्रेस धर्मनिरपेक्ष विकल्प को समर्थन देने के सिवा और कोई चारा नहीं है।“
उन्होंने कहा कि अगर वैकल्पिक नीतियों की तरफ कदम बढ़ाना है तो लोक सभा में वाममोर्चा की उपस्थिति को बढ़ाना होगा। जितनी ज़्यादा सांख्या में वाम उम्मीदवार संसद में पहुचेंगे, उतना ही धर्मनिरपेक्ष वैकल्पिक सरकार के ज़रिये जनहितैषी नीतियों को लागू करना आसान होगा । इसिलिये सीपीआई (एम) और वाममोर्चे की संख्या को संसद में बढ़ाना आवश्यक है।