मौजूदा पूंजीवादी संकट के बाद "इतिहास के अन्त” का उन्मादी शोर थम गया है
मौजूदा पूंजीवादी संकट के बाद "इतिहास के अन्त” का उन्मादी शोर थम गया है
“समाजवादी संक्रमण की समस्याएं” विषयक पाँचवीं अरविन्द स्मृति संगोष्ठी इलाहाबाद में शुरू
इलाहाबाद, 10 मार्च। पिछले कुछ वर्षों से ज़ारी पूंजीवादी व्यवस्था के संकट के बाद दुनिया भर में जनता सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रही है और पूंजीवाद के विकल्प के रूप में एक बार फिर समाजवादी व्यवस्था के बारे में चिन्तन-मनन की प्रक्रिया ने ज़ोर पकड़ लिया है। भारत में भी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श का सिलसिला शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में विज्ञान परिषद सभागार, महर्षि दयानन्द मार्ग में “समाजवादी संक्रमण की समस्याएं” विषयक पाँच दिवसीय पाँचवी अरविन्द स्मृति संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है जिसकी शुरूआत हो गयी। इस संगोष्ठी में देशभर से आये विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा विदशों से भी भागीदारी होगी।
संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए अरविन्द स्मृ्ति न्यास की मुख्य न्यासी मीनाक्षी ने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि कॉमरेड अरविन्द जैसे योग्य, प्रतिभावान, ज़िम्मेदार और ऊर्जस्वी क्रान्तिकारी को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि सर्वहारा वर्ग की मुक्ति और भारतीय क्रान्ति के जिस लक्ष्य के प्रति वे अपने आखिरी सांस तक समर्पित रहे, उससे जुड़े सैद्धान्तिक व्यावहारिक प्रयोगों का सिलसिला आगे बढ़ाया जाये और युवाओं को क्रान्तिकारी आंदोलन से जुड़ने के लिए की अनुकूल वैचारिक ज़मीन तैयार की जाये। अरविन्द स्मृति न्यास इसी लक्ष्य के प्रति समर्पित है। न्यास की स्थापना वर्ष 2010 में की गयी थी। न्यास का मुख्य कार्यालय, पुस्तकालय और अभिलेखागार लखनऊ में है।
संगोष्ठी का विषय-प्रवर्तन करते हुए अरविन्द स्मृति न्यास से जुड़ी प्रसिद्ध कवयित्री और सामाजिक कार्यकर्ता कात्यायनी ने कहा कि सोवियत संघ के पतन के बाद पूरी दुनिया में पूंजीवाद की विजय और “इतिहास के अन्त” का जो उन्मादी शोर मच रहा था वह मौजूदा पूंजीवादी संकट के बाद अब शान्त हो चुका है। परन्तु अब विभिन्न किस्म के भटकाव क्रान्तिकारी कम्युनिस्ट आन्दोलन के भीतर से ही पैदा हो रहे हैं। ऐसे में समाजवादी संक्रमण से जुड़ी तमाम समस्याओं - उस दौरान सर्वहारा वर्ग, उसकी हिरावल पार्टी और सर्वहारा राज्यसत्ता के बीच अर्न्तसम्बन्ध , समाजवादी समाज में उत्पादन-सम्बन्ध और उत्पादक शक्तियों के अर्न्तविरोध, वर्ग संघर्ष के स्वरूप और क्रमश: उन्नततर अवस्थाओं में संक्रमण से जुड़े सभी प्रश्नों पर अतीत के अनुभवों के सन्दर्भ में बहस में उतरने की सख़्त ज़रूरत है।
संगोष्ठी में पहला आलेख “मुक्तिकामी छात्रों युवाओं का आह्वान” पत्रिका के संपादक अभिनव सिन्हा ने प्रस्तुत किया जिसका शीर्षक था “सोवियत समाजवादी प्रयोग और समाजवादी संक्रमण की समस्यायें : इतिहास और सिद्धान्त की समस्यायें”। इस आलेख में सोवियत संघ में 1917-1930 के दशक के दौरान किये गये समाजवादी प्रयोगों का आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया।
संगोष्ठी के लिए विशेष रूप से नेपाल से एक दल आया है जिसमें वरिष्ठ कवि और नेपाल प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव मित्रलाल पंज्ञानी, कवि और क्रिटिकल स्टडी एन्ड रिसर्च सेन्टर के संयोजक विष्णु ज्ञवाली, गण्डकी साहित्य संगम पोखरा के सचिव राजेन्द्र पौडेल, नेपाल प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय परिषद् सदस्य प्रमोद धिताल, समीक्षक पुरुषोत्तम रिजाल, फि़ल्म समीक्षक और अखिल नेपाल चलचित्रकर्मी संघ के केन्द्रीय सदस्य माधव ढुंगेल, पत्रकार नरेश ज्ञवाली तथा नेपाल पत्रकार महासंघ के केन्द्रीय सभासद संगीत श्रोता शामिल हैं। अन्य प्रतिभागियों में मुंबई से इंडियन एयरपोर्ट इंप्लाइज़ यूनियन की अध्यक्ष दीप्ति गोपीनाथ, विस्थापन विरोधी आंदोलन से जुड़े शिरीष मेढ़ी, मुबई विश्वविद्यालय के नाट्यकर्मी नारायण खराडे, हर्ष ठाकोर, अहमदाबाद से डी के राठौड़,जयपुर से पी एल शकुन और पी एन मैंडोला, कोलकाता से संजीव चक्रवर्ती और पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, बंगाल से सामाजिक और राजनीति कार्यकर्ता, संस्कृतिकर्मी और बुद्धिजीवी शामिल हैं।
अरविन्द स्मृति न्यास की प्रबन्ध न्यासी मीनाक्षी व सचिव आनंद सिंह ने बताया कि संगोष्ठी में प्रथम तीन दिन आलेख प्रस्तुत किये जायेंगे। सोवियत संघ में समाजवादी प्रयोगों पर आह्वान पत्रिका के सम्पादक अभिनव सिन्हा, चीन में समाजवादी निर्माण, सांस्कृतिक क्रान्ति व माओवाद पर पंजाबी पत्रिका ‘प्रतिबद्ध’ के संपादक सुखविन्दर, स्तालिन और सोवियत समाजवाद पर लुधियाना के डा. अमृतपाल, ‘उत्तर-मार्क्सवादियों’ के कम्युनिज्म पर दिल्ली विश्वविद्यालय की शिवानी एवं बेबी कुमारी, क्यूबा, वेनेजुएला आदि के परिधिगत समाजवादी प्रयोगों पर दिल्ली विश्वविद्यालय के सनी सिंह एवं अरविन्द राठी, सोवियत एवं चीनी पार्टियों के बीच चली महान बहस पर गुड़गांव के राजकुमार, माओवाद एवं माओ विचारधारा के प्रश्न पर मुंबई के हर्ष ठाकोर अपना प्रस्तुत करेंगे। संगोष्ठी के चौथे एवं पाँचवें दिन इन गंभीर मुद्दों पर बहस मुबाहसा होगा।
संगोष्ठी में आज के सत्र की अध्य्क्षता नेपाल से आये प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव मित्रलाल पंज्ञानी, सिरसा से आये डा. सुखदेव और अरविन्द स्मृ्ति न्यास की मुख्य न्यासी मीनाक्षी ने की। संचालन सत्यम वर्मा ने किया।


