डॉ. अनिल पुष्कर

ग़रीबों से जन धन योजना के तहत तकरीबन ४०००० करोड़ रूपये कमाने वाली केंद्र सरकार ने गरीबों की एक-एक पाई अदानी को सौंप दी है। यह कारपोरेट की गुलाम सरकार है। दो महीने से आज तक ग़रीबों, मजदूरों, से लेकर मध्यवर्ग तक को जो दालें इस सरकार ने खिलाई हैं उनका वास्तविक मूल्य ५०-५५ रूपये किलो अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में आज भी बना हुआ है, जिसे सरकार ने १५० से २०० रूपये किलो में जनता को बेंचा है। सरकार के ऊपर इस कालाबाजारी के खिलाफ लामबंद होने की जरूरत है। या तो सरकार मुनाफे की रकम जोकि चार से छः गुना अधिक है उस धन को गरीब जनता के लिए उन्हें, आवास, रोज़गार, अस्पताल, स्कूल और सामाजिक सुरक्षा देने में खर्च करे वरना जनता के सामने यह बात अब खुल गई है। सरकार को इसका भुगतान तो करना ही होगा।
साथियों यह दाल का मामला हर गरीब के पेट से जुड़ा हुआ है। अब इस लोकतंत्र में कालाबाजारी का रोग लग चुका है इसे जड़ से खत्म करना होगा। यह सरकार मध्य प्रदेश, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, राजस्थान से लेकर पूरे देश में भ्रष्टाचार और कालाबाजारी का आतंक कायम कर रही है। इसे हमें मिलकर रोकना होगा।
केंद्र सरकार को इस कालाबाजारी का जवाब देना होगा। वरना देश की जनता का जो धन सिंडिकेट के भरोसे देश से बाहर गया है उसे वापस लाकर हर ग्रिब्ब और जरूरतमंद के ऊपर इसे खर्च करना होगा। देश का धन हम इस तरह लुटाने नहीं देंगे।
ये सरकार देश की जनता ने चुनी है इसे देश की जनता ही सबक सिखा सकती है।
यह कालाबाजारी के ठगों की हितैषी सरकार है।
यह भ्रष्टाचार करने वालों की सरकार है।
यह हिंसा, हत्या, और दलितों, गरीबों, अल्पसंख्यकों का कत्ल करने वाली सरकार है।
यह घूसखोरी करने वालों की सरकार है।
यह मानवता को कलंकित करने वाली सरकार है।
यह अपराधियों के माफिया को खुश करने वाली सरकार है।
यह हत्या की राजनीति करने वाली सरकार है।
यह पशुओं के नाम पर आदमी की जान लेने वाली सरकार है।
यह डी-कम्पनी वाली सरकार है।
यह अलोकतांत्रिक सरकार है।
जनता इस सरकार के खिलाफ है।