यह दम भाजपा में ही है कि अलगाववादियों से भी गठबंधन कर के राष्ट्रवादी बनी रहे
यह दम भाजपा में ही है कि अलगाववादियों से भी गठबंधन कर के राष्ट्रवादी बनी रहे
त्रिपुरा में भाजपा के अच्छे प्रदर्शन और भाजपा गठबंधन की जीत पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। हालांकि भाजपा जो कर सकने में सक्षम है और केवल त्रिपुरा ही नहीं नगालैंड और मेघालय में जो उसके बेहतर प्रदर्शन का मूल मंत्र रहा है उस पर बहुत कम बात हो रही है।
भावनाएं भड़काने और उसके दोहन में कोई अन्य दल उसके करीब भी नहीं है। उत्तर पूर्व में हिंसक अलगाववाद की समस्या रही है। स्वभाविक है कि उन संगठनों का जनाधार भी रहा होगा। निःसंदेह उन अलगाववादी संगठनों से गठबंधन कर भाजपा ने उसका लाभ उठाया। कश्मीर में चुनाव उपरांत पीडीपी के साथ गठबंधन की सरकार बनाने के बाद उत्तर पूर्व के अलगाववादी संगठनों के साथ चनाव पूर्व गठबंधन एक साहसी कदम था जो भाजपा के अलावा कोई अन्य दल भाजपा और सघं के दुष्प्रचार के भय से कर पाने का साहस नहीं कर सकता था। यह दम भाजपा में ही है कि अलगाववादियों से भी गठबंधन कर के वह राष्ट्रवादी बनी रहे। किसी अन्य दल द्वारा ऐसा करने पर भाजपा और संघ में ही यह ताकत है कि उसे राष्ट्र विरोधी घोषित कर दें। जब तक भाजपा ऐसा कर पाने में सक्षम है इस तरह के नतीजों पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए। रही बात माणिक सरकार के सत्ता से बाहर जाने की तो खुद भाजपा के रणनीतिकार भी अपनी जीत और जनता की मूर्खता पर हंस रहे होंगे।


