यह नेक काम सिर्फ कोई वेद प्रताप वैदिक ही क्यों करेंगे? कोई शाहनवाज़ मलिक क्यों नहीं कर सकता?
यह नेक काम सिर्फ कोई वेद प्रताप वैदिक ही क्यों करेंगे? कोई शाहनवाज़ मलिक क्यों नहीं कर सकता?
शाहनवाज मल्लिक
हाफ़िज़ सईद के इंटरव्यू की कोशिश में जब मुझपर हमले हुए तो मुझे कई जर्नलिस्ट के मुझे फोन आए। कुछ ढाल बनकर मेरे आगे खड़े हो गए तो कई मुझपर चीखते रहे। एक प्रतिक्रिया कुछ यूं थी कि तुम इंडिया के मोस्ट वांटेड आतंकवादी का इंटरव्यू करोगे। उसपर मुंबई अटैक समेत कई आतंकी हमलों के इल्ज़ाम हैं। वह बात करने के लायक नहीं है। अगर वह मेरे सामने पड़ जाए तो मैं उसे उड़ा दूंगा। ज़िंदगी में पहली बार मैं इस क़दर तनाव से घिरा हुआ था। बिना किसी बहस के मैं सिर्फ उन्हें सुनता रहा और जी, जी करता रहा। लेकिन खरा सवाल यह है कि हाफिज़ सईद को उड़ाने से क्या होगा। सईद को उड़ाने पर बगदादी की तरह पाकिस्तान में कोई नया ख़लीफ़ा क्यों नहीं पैदा होगा?
मेरी कोशिश का मक़सद बिल्कुल साफ था। मैं सईद से ख़ूनखराबे के मायने पूछने और उसके जीवन में शांति की अहमियत जानने के लिए उत्सुक था। बीबीसी से बातचीत में वेद प्रताप वैदिक कहते हैं कि मैंने अपनी जान पर खेलकर भारत के लिए बहुत बड़ा काम किया है. दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध बनाने के लिए नेक काम किया है. मेरा बचाव करने की किसी को ज़रूरत नहीं है." अगर वाक़ई वैदिक की मंशा यही थी तो मेरा सीधा सवाल है कि यह नेक काम सिर्फ कोई वेद प्रताप वैदिक क्यों करेंगे? कोई शाहनवाज़ मलिक क्यों नहीं कर सकता?
शाहनवाज मल्लिक की फेसबुक टाइमलाइन से


