यह व्यवस्था ऐसे विरोध को नहीं पचा पाती है, इसीलिए उदय भानु जैसे लोगों को बेरहमी से मारा जाता है
ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने रोहित वेमुला के जाने के बाद भी उनका अपमान करना जारी रखा
सुयश सुप्रभ
हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के उदय भानु को पुलिसवालों ने केवल इसलिए नहीं पीटा कि उन्होंने ऐसे कैंपस में अपने साथियों के लिेए खाना बनाने का 'अपराध' किया जहाँ मेस बंद कर दिए गए थे।
उदय भानु का सबसे बड़ा अपराध यह था कि उन्होंने रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद उनके शव को परिवारवालों को सौंपने की माँग की थी। हमारी ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने रोहित वेमुला के जाने के बाद भी उनका अपमान करना जारी रखा। उनके मित्रों को रोहित वेमुला से यह कहने का भी मौका नहीं दिया गया कि वे उनके संघर्ष को अंतिम साँस तक मज़बूत बनाने का काम करेंगे।
रोहित वेमुला के शव को गुपचुप तरीके से जला दिया गया। उदय इसी का विरोध कर रहे थे। यह व्यवस्था ऐसे विरोध को नहीं पचा पाती है, इसीलिए उदय जैसे लोगों को बेरहमी से मारा जाता है।
30 मार्च को दोपहर एक बजे दिल्ली के उन साथियों की आवाज़ में आवाज़ मिलाने ज़रूर पहुँचिए जो तमाम उदयों के ख़िलाफ़ रचे जा रहे षड्यंत्र का विरोध कर रहे हैं। यह विरोध रैली मंडी हाउस से राष्ट्रपति भवन तक जाएगी। अगर आज आप चुप रहे तो कल कुछ बोलने की स्थिति में नहीं रहेंगे। यही हमारे समय का डरावना सच है।
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सुयश सुप्रभ की फेसबुक टाइमलाइन से साभार