याकूब मेमन के मामले में न्याय का भद्दा मजाक बना है
याकूब मेमन के मामले में न्याय का भद्दा मजाक बना है
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) मार्कण्डेय काटजू ने रविवार को कहा कि याकूब मेमन के मामले में न्याय का भद्दा मजाक बना है।
काटजू ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि अदालत के फैसले को ध्यान से पढ़ने के बाद उन्होंने पाया कि जिस सबूत के आधार पर मेमन को दोषी ठहराया गया वह ‘बहुत कमजोर’ है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सबूत सह-आरोपी का वापस लिया हुआ बयान और कथित बरामदगी है।’’ वापस लिए हुए बयानों के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘हर कोई जानता है कि हमारे देश में पुलिस किसी तरह से यातना देकर बयान लेती है।’’
काटजू ने आगे कहा कि यातना ऐसी खतरनाक चीज है जिस कारण कोई कुछ भी कुबूल कर लेगा।
उन्होंने बरामदगी के बारे में कहा, ‘‘याकूब मेमन के मामले में बयान को वापस ले लिया गया।’’
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