युद्ध की मानसिकता इन दिनों
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तुम्हें नहीं लगता जी रहा देश
युद्ध की मानसिकता
दनादन दगते कटाक्ष के गोले
सतत चलते शब्दों के ज़हर बुझे तीर
'इन दिनों'
हम सुविधानुसार बाँटे गये
सेनाओं उपसेनाओं में
असहमत हैं तो मित्र नहीं शत्रु हैं
कौरव हैं या पांडव
देश कुरुक्षेत्र बना
सतत महाभारत घट रहा
'इन दिनों'
हुंकार रैली महारेली
शंखनाद रेली
धिक्कार दिवस
थू थू रेली
स्वाभिमान रेली
बकवास रेली
सब तरफ़ चित्कार फुत्कार
रेलीयों की रेलमपेली
'इन दिनों'
खाप पंचायत महा पंचायत
महामृत्युजंय जाप पंचायत
मानों देश में हांका पड़ा
तुरही नाद नगाड़े जय घोष
युद्धोन्माद ही तो है
कौन सुने इस तूती की आवाज़
'इन दिनों'
आइने में देखता हूँ अपना चेहरा
घबरा जाता हूँ
हिंस्र हुआ जाता है
आँखें लाल हुईं
माथे बल पड़ गये
भृकुटि भी तनी रहती है
'इन दिनों'
// जसबीर चावला //