युवाओं का फूटा गुस्सा, दैनिक जागरण और आऊटलुक की प्रतियां जलाईं
युवाओं का फूटा गुस्सा, दैनिक जागरण और आऊटलुक की प्रतियां जलाईं
लखनऊ। मध्य प्रदेश में बलात्कारों की बाढ़ आई हुई है, दलित नाबालिक के साथ सामूहिक बलात्कार के बाद जला दिया जाता है, छत्तीसगढ़ में गृह मंत्री बलात्कार को जस्टीफाई करते हैं, जयपुर में विदेशी पर्यटक के साथ बलात्कार होता है लेकिन यह समाचार दैनिक जागरण की सुर्खियां नहीं बनते। पुणे में भारतीय जनता पार्टी समर्थक हिन्दू राष्ट्र सेना द्वारा एक आईटी प्रोफेशनल की पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है लेकिन दैनिक जागरण से खबर गायब रहती है। भाजपा के दंगाई विधायक संगीत सोम द्वारा पुलिस को खुलेआम धमकी दी जाती है कि बवाल कर दूँगा संभाले नहीं संभलेगा, लेकिन दैनिक जागरण की कलम संगीत सोम पर नहीं चलती।
इन्ही मुद्दो को लेकर आज सायं 4 बजे जागरूक युवा डॉ इमरान और अजित प्रताप सिंह के नेतृत्व में दैनिक जागरण और आऊटलुक की प्रतियां सांकेतिक रूप से विधानसभा के सामने जलायी गयीं। उनके साथ प्रमुख रूप से लखनऊ के आशीष सिंह राजा, बहराइच आनंद सिंह व उनके साथी, बाराबंकी से दानिश सिद्दीकी, रोहित, डॉ. पीयूष, प्रतापगढ़ के जावेद अंसारी, गाजीपुर से योगेन्द्र राय और उनके साथी सुल्तानपुर के धीरू वर्मा, फैज़ाबाद के सुशील सिंह तथा इलाहाबाद विश्यविद्यालय के छात्र नेता साजिद अली, अजित यादव, अतुल यादव थे। नेता द्वय ने सरकार से मांग की कि वरिष्ठ पत्रकारों की एक जांच समिति बनाकर दैनिक जागरण की जांच कराई जाए। उन्होंने बताया कि वह प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में भी इस बावत शिकायत दर्ज कराएंगे। और यदि बदलाव न किया गया तो लोकतान्त्रिक तरीके से पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जायेगा
डॉ. इमरान इदरीस व अजित प्रताप सिंह ने कहा कि पूरे मुल्क में महिलाओं पर ज़ुल्म और रेप की घटनाओ से इंसानियत शर्मसार हुई है अगर हम सिर्फ़ द हिंदू की रिपोर्ट को देखें तो 2001-2011 तक के आंकड़े बताते हैं कि देश मे 48338 बहनों के साथ रेप हुए जिसमे मध्य प्रदेश पहले नंबर पर रहा जहां 9465 रेप हुए दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र में 6868 और उत्तर प्रदेश में 5449 घटनाए हुईं और इसमे सबसे ज़्यादा शिकार गर्ल चाइल्ड रहीं। बच्चो के वेलफेर के लिए मध्य प्रदेश मे 48 कमिटी महाराष्ट्र ने 35 बनाई वही उत्तर प्रदेश की सरकार ने 69 चाइल्ड वेलफेर कमिटी का गठन किया गया। एनसीआरबी की रिपोर्ट कहती है कि मुल्क में हर 20 मिनिट पर एक रेप होता है। यह घटनाएं जघन्य अपराध में रखी जाती हैं ऐसी हैवानियत को इंसानियत माफ़ नही कर सकती!
2014 मे अच्छे दीनो की आमद के बाद, कॉरपोरेट जगत् के जल जंगल ज़मीन लूटने के पूर्ण अधिकार मिलने के साथ ही जिस तरह सोशलिस्ट चीफ़ मिनिस्टर अखिलेश यादव ने सरकार संभाली और मज़दूर किसान के दिन फिर गये, उत्तर प्रदेश की हर ओबीसी दलित बेटी के लिए सिक्षा के दरवाज़े खोल दिए गये तरक़्क़ी के दरवाज़े खोल दिए गये यह देश की दक्षिणपंथी ताक़तों और कॉरपोरेट जगत से देखा ना गया क्योंकि इनका सपना गरीब मज़दूर को हाशिए पर ला देना रहा है। संघी ताक़तो ने पहले दंगे करवाके प्रदेश मे उथल पुथल मचा के प्रदेश की एकता को चुनौती दी लेकिन वो कामयाब नहीं रहे। बदायू रेप कांड के बाद तो जैसे इंसानियत को शर्मसार ही कर दिया गया लेकिन प्रदेश की पुलिस अपनी मुस्तैदी और सरकार की ऐसी घटनाओं को लेकर ज़ीरो टोलेरेंस की नीति की वजह से बलात्कारी अगले कुछ घंटो मे पकड़े गये लेकिन मीडिया ने ऐसे प्रदर्शित किया कि जैसे पूरे देश में हर जगह को छोड़कर सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में ही ऐसी अप्रिय घटनाए हो रही हों। एनसीआरबी की रिपोर्ट कहती है कि मध्य प्रदेश देश मे रेप होने के मामलो मे सबसे उपर है लेकिन सवाल अगर पूछा जाए की मध्यप्रदेश चर्चा मे क्यों नहीं है क्या हर 20 मिनिट में होने वाले रेप का संबंध मध्य प्रदेश से नही है?


