ये कैसे प्रभु, आंदोलनरत कर्मचारियों से तो मिले नहीं, 16 और की नौकरी छीन ली
ये कैसे प्रभु, आंदोलनरत कर्मचारियों से तो मिले नहीं, 16 और की नौकरी छीन ली
नई दिल्ली। रेल मंत्री सुरेश प्रभु का ट्विटर मीडिया में बहुत लोकप्रिय है। लगभग रोज़ ही मीडिया में कोई न कोई प्लांटेड खबर रहती है कि सुरेश प्रभु के ट्विटर पर पर शिकायत का तुरंत सज्ञान लेकर कारवाई की गई, लेकिन आईआरसीटीसी के अपने कर्मचारियों के लिए 10 से 12 के बीच बाथरूम जाने रोक की खिलाफत करने वाले महिला व पुरुष कर्मचारियों के हजारों ट्वीट का रेलमंत्री, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री दिल्ली सरकार, अध्यक्ष दिल्ली महिला आयोग इत्यादि ने कोई जबाब देना मुनासिब नही समझा। इतना ही नहीं, रेलमंत्री श्री सुरेश प्रभु दिनांक 21 मार्च 2016 दिन सोमवार को आईआरसीटीसी के कॉर्पोरेट ऑफिस पहुँचे और आंदोलनकारी कर्मचारियों से मिले बिना ही लौट भी आए।
सभी कर्मचारियों का अनुमान था कि कर्मचारियों के मुद्दे पर संज्ञान लिया जाना तय है।
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आईआरसीटीसी में महिला कर्मचारियों के शौचालय जाने पर रोक, शिकायत करने पर नौकरी से निकाला
बता दें कि भारत सरकार के रेल मंत्रालय के उद्यम इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेटशन लिमिटेड (आईआरसीटीसी) के ई-टिकटिंग यूनिट कर्मचारीगण पिछले डेढ़ महीने से मैनेजमेंट द्वारा 92 कर्मचारियों के गैर कानूनी टर्मिनेशन के खिलाफ आईटी सेंटर के गेट पर धरने पर हैं, जो कि आईआरसीटीसी मुख्यालय स्टेट्समैन हॉउस से महज एक किलोमीटर से भी कम दूरी स्टेट इंट्री रोड पर स्थित है।
कर्मचारियों के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले सुरजीत श्यामल का कहना है कि
हमारे साथीगण काफी उत्साहित थे कि मंत्री महोदय अपने बहुमूल्य समय से समय निकालकर हमारे धरना स्थल पर जरूर आयेंगे और हमारी समस्याओं को सुनकर दूर करेंगे। मगर मंत्री साहब ने धरना स्थल पर मिलना तो दूर किसी कर्मचारी से बात करना मुनासिब नहीं समझा। कर्मचारी भी धैर्य का परिचय देते हुए अपने धरना स्थल पर शांतिपूर्वक बैठे इंतजार करते रह गये। किसी कर्मचारी या कर्मचारी प्रतिनिधि से बात किये बिना मंत्री महोदय बोर्ड मेम्बर के साथ मीटिंग कर प्रस्थान कर गये।
सुरजीत श्यामल कहते हैं
ऐसे तो मोदी और केजरीवाल सरकार महिला सशक्तिकरण का ढोल पीटते हुए नहीं थकती है, मगर देश की राजधानी दिल्ली में बहन बेटियों को बेईज्जत करने वाले नौकरशाहों को बचाने में इन सरकारों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।
नौकरी से निकाले गए 99 IRCTC कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
आईआरसीटीसी एम्प्लाइज यूनियन महासचिव सुरजीत श्यामल ने बताया कि भले ही प्रभु जी कर्मचारियों से नहीं मिले, मगर उनके जाते ही मोदी मॉडल के नाम पर ई-कैटरिंग में काम करने वाले 16 ठेका कर्मचारियों की नौकरी छीन ली गई। उन्होंने बताया कि दिनांक 23 मार्च 2016 को श्री पी.सी.बिहारी डी.जी.एम. आईआरसीटीसी ने डीए डिजिटल (ठेकेदार) नोटिस जारी कऱ तत्काल प्रभाव से 16 कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट समाप्त होने का हवाला देते हुए नौकरी से निकाल दिया है। मगरूर प्रबंधन के अधिकारियों ने नौकरी छीनते हुए इतना भी नही सोचा कि होली के त्योहार में वर्षों से बिना कोई शिकायत के काम करने वालों कर्मचारियों को बोनस/ईनाम दिया जाता है। खैर हमेशा ये ऊपर के आदेश का हवाला देते हैं।
श्री श्यामल ने बताया कि अभी रेल बजट में आईआरसीटीसी को कैटरिंग दुबारा से वापस मिला है। अभी आईआरसीटीसी को कैटरिंग का काम मिलने से कर्मचारियों की जरूरत होनी चाहिए, फिर कर्मचारियों की नौकरी क्यों छीनी जा रही है? आखिर लगातार चलने वाले काम को धड़ल्ले से आउटसोर्स क्यों किया जा रहा है? अगर मंत्री महोदय को कैटरिंग सेवा आईआरसीटीसी को देकर ठेका पर ही चलाना था तो यह काम तो ऐसे पहले भी रेल मंत्रालय भी कर ही रही था। आखिर ठेका के गोरखधंधा में कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है।
सुरजीत श्यामल ने सवाल किया कि एक तरफ तो सरकार केन्द्रीय कर्मियों को डीए और सातवें वेतन आयोग का लाभ दे सकती है, मगर उनके वर्षों से उनके "समान काम" करने वाले ठेका कर्मचारियों को मात्र मिनिमम वेजेज से सन्तोष करना पड़ रहा है। आज पूरे देश में इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन के रिपोर्ट के अनुसार एक करोड़ 25 लाख सरकारी कर्मचारियों में केवल लगभग 69 लाख कर्मचारी ठेके पर काम करते हैं। आखिर केंद्र व राज्य सरकार समान योग्यता व अनुभव होने के कारण सौतेला व्यवहार क्यों कर रही है। अब सरकार से आशा करना व्यर्थ है और कर्मचारियों को एकजुट होकर सड़क का आंदोलनात्मक कारवाई से ही हक मिल सकता है।


