आशुतोष सिंह
लखनऊ , जनवरी । वंशवाद को लेकर भाजपा में सिर फुटव्वल बढती जा रही है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह को पहले विधान सभा चुनाव के टिकट से वंचित होना पड़ा और जब उसकी भरपाई के लिए उन्हें पार्टी में महासचिव बनाने की तैयारी हुई तो आज यहां संगठन में बगावत के हालत पैदा हो गए । पंकज सिंह को जैसे ही महमंत्री बनाने की जानकारी मिली तीन मंत्रियों ने इस्तीफे की पेशकश कर दी। इन मंत्रियों में संतोष सिंह, दया शंकर सिंह और अश्वनी त्यागी बताए गए है । गौरतलब है कि नेताओं के पुत्रों को लेकर भाजपा में पहले से घमासान चल रहा है । लखनऊ में लालजी टंडन के पुत्र गोपाल टंडन क लेकर पहले ही काफी विवाद हो चुका है पर पैरवी में लालजी टंडन भारी पड़े और टिकट ले लिया । पर पंकज सिंह इतने सौभाग्यशाली नहीं रहे और उन्हें समायोजित करने के लिए प्रदेश में महासचिव बना दिया गया है । पार्टी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा - पंकज सिंह को महामंत्री बनाया गया है । यह अध्यक्ष का विशेषाधिकार है कि वे पार्टी में किसे कौन सी जिम्मेदारी दें। जहां तक तीन मंत्रियों के इस्तीफे की पेशकश की जानकारी मुझे नहीं है ।
दूसरी तरफ जानकर यह भी बताते है कि बगावत करने वाले शाही खेमे के है । पार्टी के प्रदेश मंत्री संतोष सिंह ने जनसत्ता से कहा -पार्टी के लिए हम लोग जीजान से जुटे रहते है और बावजूद इसके वंशवाद को बढ़ावा देते हुए नेता पुत्रों को हम पर थोप दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है ।गौरतलब है कि संघ की शाखा में वंशवाद के खिलाफ लड़ाई की सीख दी जाती है। तो वहीँ दूसरी तरफ भाजपा में इसी तर्ज पर लोगों को पद देकर सुशोभित किया जा रहा है । भाजपा का कहना है कि पंकज सिंह के प्रदेश महामंत्री पद पर विराजमान होने से युवा कार्यकर्ताओं में जोश बढेगा। जोश तो कार्यकर्ताओं का कितना बढेगा यह तो वक़्त बताएगा पर फिलहाल भाजपा में अंतर्कलह बढती दिख रही है। इन तीनो पार्टी मंत्रियों का कहना है कि पार्टी के लिए हमने जी तोड़ मेहनत की और जब टिकट की बारी आई तो हमको चुप करा दिया गया । सिर्फ नेता पुत्र होने के नाते पंकज सिंह को महामंत्री पद पर विराजमान कर दिया गया । हम आज भी पार्टी के विचारधारा के साथ है पर हमारी लड़ाई सिर्फ पार्टी में चल रहे वंशवाद के खिलाफ है जिसकी सीख हमे संघ शाखा में दी गई है। इसी लिए हम लोगों ने अपने इस्तीफे पार्टी को सौंप दिए हैं । गौरतलब है की राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह ने इसके पहले आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भी अपनी दावेदारी पेश की थी। जिसमें वाराणसी व लखनऊ पूर्व की सीट शामिल थी। पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी का सर्वे में यह पेशकश फिट नहीं बैठी। लखनऊ पूर्व की सीट पर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कलराज मिश्र को उम्मीदवार बनाया गया। तो वहीँ वाराणसी से पार्टी ने अपनी पुरानी नेता ज्योत्स्ना श्रीवास्तव को फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है। भाजपा में इसके पहले भी नेता सुपुत्रों ने सीट की मांग की थी। जिनमें बाद में कुछ नेता पुत्रों को टिकट दे दिया गया । जिनमें लालाजी टंडन के पुत्र गोपाल टंडन प्रमुख है। नेता पुत्रों को टिकट देने के मामले में भाजपा में पहले ही पार्टी के कई दिग्गज नेताओं व कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी। अब तो पार्टी कार्यकर्त्ता दबी जुबान कहने लगें हैं कि भाजपा में कितने साल से आप कार्यकर्त्ता हैं इससे कोई मतलब नहीं बस नेता पुत्र का ठप्पा होना चाहिए।
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