नई दिल्ली,9 जनवरी। महाराष्ट्र राज्य में 720 किलो मीटर का समुद्री किनारा है, जो देश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह किनारा मच्छीमारी व्यवसाय करनेवालों का प्रमुख रोजगार साधन है। इन मच्छीमारों का सबसे बड़ा त्यौहार ‘नारीयल पुनम’ है जो महाराष्ट्र के सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सांस्कृतिक धरोहर का प्रदर्शन झाँकी के रूप में राजपथपर इस वर्ष गणतंत्र दिन समारोह के अवसर पर महाराष्ट्र राज्य की ओर से प्रस्तुत होगा।

कैसी दिखेगी महाराष्ट्र की झाँकी

इस झाँकी के अग्रभाग में बड़ी मछली जो झींगा मछली 7 कोलमी या प्रान्स नाम से जानी जाती है, उसे रखा गया है। उसके पीछे बड़ी नौका में सुवर्ण नारियल रखा हुआ है, जिसकी पूजा अर्चना की जाती है। सामने दम्पति विधिवत पूजा करके समुद्र को नारियल सर्मपण करते हुये दिखाई देते हैं। नौका के पिछले हिस्से पर मछली पकड़ने वाली जाल लगी हुई है। नौका के आजू-बाजू में अलग-अलग मछलियाँ दिखाई दे रही हैं। नाव की ऊपरी सतह पर और बगल में परीवार के साथ नृत्य करते हुये मछवारे दिखाई देते हैं। महाराष्ट्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिकता का दर्पण झाँकियों व्दारा प्रत्येक वर्ष प्रदर्शित किया जाता है। इस वर्ष ‘नारियल पूनम’ इस सांस्कृतिक त्यौहार की झलक दिखाई जा रही है। इस झाँकी की तयारी दिल्ली कॅन्ट के रंगशाला मे चल रही है। इस झाँकी की संकल्पना, थ्रीडी चित्रण जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स के पूर्व प्रोफेसर नरेंद्र विचारे ने की है। झाँकी को बनाने के लिए मुंबई के जे.जे.स्कूल ऑफ आर्ट्स से 22 कलाकारों का समूह आया है। महाराष्ट्र राज्य के सांस्कृतिक कार्य संचालनालय की ओर से प्रत्येक वर्ष झाँकियों का नियोजन होता है। महाराष्ट्र को कई बार प्रथम पुरस्कार से गौरवान्वित भी किया गया है।