जुगनू शारदेय

क्या जमाना था । इसके बिना नेता , नेता नहीं हो पाता था । कार्यकर्ता कुछ मीठा हो जाए कह नहीं पाता था । राजनीति या सरकार जब फंसती थी तो यह होता था सरकार या राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए । और तो और ,आज न हमारी राजनीति या सरकार मुंह धो कर भ्रष्टाचार के पीछे पड़े हैं । तब इसे पाते ही पहली सलाह दी जाती थी कि माल कमाना छोड़ दो । इसकी उस काल में कितनी महिमा थी कि इसे राजयोग कहा जाता था । योगों का राजा था यह । तभी तो कहलाया राजयोग । अब राजयोग का मतलब ही बदल गया है । राजयोग से राजरोग भी जुड़ गया है । राजरोग का असली मतलब यह होता है कि इसके योग ने भ्रष्टाचार या महंगाई को कितना बढ़ावा दिया है । बिना इसे बढ़ावा दिए राजरोग या राजरोग सिर्फ राजभोग हो कर रह जाता है ।जैसे अभी अभी कांग्रेस पार्टी की महंगाई और भ्रष्टाचार ने भामक जनता पार्टी को राजरोग लगा दिया है । तो उन्हें राजयोग सामने दिख रहा है ।जहां उनका राजयोग , जैसे कर्नाटक तो वहां राजभोग तो चल ही रहा है । राजभोग की परंपरा और मर्यादा भी कांग्रेस पार्टी ने ही तय की है ।राहुल गांधी तो राजरोग के साथ ही जन्मे हैं । उन्हें राजयोग में जाने के लिए नए सिरे से भारत की खोज करना हैं । भारत की खोज उनका पुश्तैनी मामला है । पता नहीं यह भारत क्या बला है । पता नहीं कितने लोग ,न जाने कब से इसकी खोज कर रहे हैं । हमें तो बचपन में गुरू जी ने पढ़ाया था कि लाखों साल में बने जंबू द्वीपे भारत खंडे के भारत की खोज पांच सौ साल पहले वास्को द गामा ने की थी । राजरोग उस काल में भी था । यहां यह समझ लेना आवश्यक है कि जहां राजरोग होता है , वहां राजयोग भी होता है । राजभोग तो अपने आप हो जाता है ।
अभी अभी यूपीए 2 ने अपने राजरोग से कुछ लोगों को राजयोग का अवसर दे कर राजभोग बना दिया है । यह अजीब सा राजभोग है कि कुछ लोगों का भोग योग में भी नहीं राजरोग में बदल दिया है । अब देखिए न बेनी प्रसाद वर्मा 1996 में काबीना मंत्री हुआ करते थे , अब कांग्रेस के राजरोग में राज्य मंत्री ,स्वतंत्र प्रभार हो गए । यह यूपीए की एक परंपरा भी है । 1996 के सूरमा मंत्री श्रीकांत जेना भी तो राज्य मंत्री के ओहदे से संतोष कर रहे हैं।
मुकेश अंबानी के पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्री हो गए । कॉरपोरेट अफेयर्स में भी मुकेश भाई की मदद ही करेंगे देवड़ा साहब। तरक्की दे कर कैसे किसी को इतना भारी बना दिया जाता है कि उसकी हैसियत ही कम हो जाती है । जैसे एनसीपी के प्रफ्फुल पटेल को हवाई जहाज से भारी उद्योग का बड़ा मंत्री बना दिया । उड़ो मत , बैठो रहो सरकारी उपक्रमों पर । यहां के मंत्री विलास राव देशमुख को ग्रामीण विकास मंत्री बना दिया गया।दरअसल असली राजरोग का असली राजयोग हुआ है । कहते हैं कि इस राजयोग के पीछे उलटा प्रदेश का 2012 का विधान सभा चुनाव है । यह भी एक ईश्यटाइल है ,अपने अंदर के राजभोग को राजरोग में बदलने का । इसे ही कहते हैं स्टाइल जो कोई स्टाइल नहीं होता ,बल्कि घोंघाप्रसाद वसंतलाल होता है । अभी भी बचा है राजभोग का अवसर – लगे रहो …