राष्ट्रपति महोदय से मेहदी हसन ऐनी (क़ासमी) की गुहार - कश्मीर और कश्मीरियों को टूट कर बिखरने से बचा लीजिए
सेवा में
श्रीमान महामहिम राष्ट्रपति महोदय
भारत सरकार
विषय : कशमीर में सेना द्वारा किये जा रहे अमानवीय कार्रवाई,कर्फ्यू और मानवअधिकार हनन आदि के मुआमले में!
मान्यवर!
कश्मीर आज़ाद भारत का वह मुकुट है जिस की सुंदरता व अद्भुदता की वजह से हम सारी दुनिया में फख्र के साथ उसका ज़िक्र करते हैं.
शायर, कवि, साहित्यकार अपनी रचनाओं में कशमीर को जन्नत कह कर पुकारते हैं,
पर उसी जन्नत में इन दिनों आग लगी हुयी है.
"45 दिन" तक कर्फ्यू, 70 हत्याएं, 06 हज़ार घायल,15 लाख पैलेट बुलेट का इस्तेमाल,
600 लोग आंखों से महरूम,
सैंकड़ों औरतें विधवा,और हजा़रों बच्चे यतीम,
व अपाहिज.
ये उसी जन्नत का लेखा जोखा है.
महामहिम राष्ट्रपति महोदय!
ये हमारे अटूट भारत के ही एक राज्य कश्मीर में पिछले 45 दिनों से भारतीय सेना द्वारा किये गये अमानवीय कार्रवाई की एक झलक है.
पिछले 45 दिनों से हमारे अपने भाई,
अटूट भारत के भागीदार,बराबर के हिस्सेदार,
कश्मीरी नागरिक किन सख्त हालात का सामना कर रहे हैं हम देश वासियों को उसका इहसास भी रात भर सोने नहीं देता।
दूध पीते बच्चों के लिए दूध नहीं, खाने के लिए सब्ज़ी दाल और चावल नहीं, इलाज के लिए दवा नहीं।
सेना के पैलेट बुलेट से आंख गंवाने, बदन छलनी करवाने वाले बच्चों व जवानों के लिए हास्पिटल में जगह नहीं।
ऊपर से हर नागरिक को अलगाववादी और आतंकवादी समझ कर सेना बिलाझिझक प्रहार कर रही है।
महोदय!
कश्मीर के हालात बेहद चिंताजनक होते जा रहे हैं।
और स्थानीय व केन्द्रीय सरकार की नीति पूरी तरह से विफल हो रही है।
गृहमंत्रालय भी अभी तक कर्फ्यू हटवाने या हालात सामान्य करवाने में नाकाम रहा है।

सेना द्वारा पैलेट बुलेट का बेजा इस्तेमाल कश्मीरियों को अंधा बना रहा है।
मानवाधिकारों का खूब उल्लंघन किया जा रहा है।
छोटे-छोटे बच्चे, औरतें और नौजवान अपाहिज होते जा रहे हैं।
माननीय राष्ट्रपति जी!
यह तरीका न तो शान्ति स्थापित कर पायेगा और न ही दहकते कश्मीर की आग को बुझा पायेगा।
सेना को वहां स्थिति को सामान्य करने और मुसीबतों को ख़त्म करने भेजा गया है ना कि वहां जा कर स्थिति और गंभीर करने।
भारत की सेना बहुत महान है, हम देशवासियों पर हमारी सेना के बहुत उपकार हैं जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता।... लेकिन कश्मीरी भी अपने हैं। इसी देश के निवासी हमारे भाई और बहन। सेना एक बहुत जिम्मेदार संगठन है, जिससे ये उम्मीद नहीं की जा सकती कि वो इन अमानवीय कृत्यो में उलझ कर इंसानियत को ही भुला बैठे....
राष्ट्रपति महोदय!
अब जबकि कश्मीरी व केंद्रीय सरकार की नीतियां नाकाम हो चुकी हैं, हिंसा दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं।

ऐसे में ज़मीं के जन्नत कशमीर में अमन बहाल करने के लिए आप के द्वारा हस्तक्षेप करना बहुत ज़रूरी है।
आदरणीय!
आपसे अनुरोध है कि आप अब अपनी पॉवर का इस्तेमाल करते हुए केन्द्रीय सरकार को आदेश दें कि वो तुरन्त अलगाववादी नेताओं से बात करें। हिंसा रोके और सेना को बैरकों में वापस आने का आदेश दें। साथ ही सरकार को मरने वालों व जख़्मियों को मुवाअज़ा देने का आदेश दें।

और ये भी आदेश दें कि सरकार कश्मीरियों का विश्वास बहाल कर, उनका भरोसा जीतने की कोशिश करे।
उन्हें जम्हूरियत कश्मीरियत और इंसानियत में विश्वास दिलाये। सेना से हो रहे मानवाधिकार हनन का जायज़ा ले।
और सेना की विचारधारा में कश्मीरी जनता से जो नफरत रच बस गयी है उसे खत्म कराये।
राष्ट्रपति महोदय!
देश की जनता अब आप की ओर उम्मीद की निगाहों से देख रही है, इसलिए आप से विनती है कि कश्मीर और कश्मीरियों को टूट कर बिखरने से बचा लीजिए...
वरना इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा।
आप को इसी आशा के साथ ये पत्र लिख रहा हूँ कि आाप कश्मीरियों के दर्द को समझते हुए फौरी कदम उठाएंगें। ...और देशवासियों को कश्मीर में अमन की बहाली के तौर पर एक हसीन सौग़ात देंगें।
हम आपके सदैव आभारी होंगे।
भवदीय
मेहदी हसन ऐनी (क़ासमी)
गाँव /पोस्ट
मोमिनपुरा नसीराबाद
(जनपद)रायबरेली यू.पी.
पिन229307