फैसला पंचायत के जरिये
मुसलमानों को इंसाफ से वंचित करने की सपाई साजिश- रिहाई मंच
मदरसों पर किये गये सुनियोजित हमले
12 वर्षीया बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार करके काट कर तेजाब से जला देने का आरोप- रिहाई मंच

कांधला, कैराना, मलकपुर, खुरगान सांप्रदायिक हिंसा पीड़ित कैंप शामली से, 26 सितंबर 2013। रिहाई मंच ने कहा है कि जिस तरह मुलायम सिंह यादव और उनका कुनबा पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाये जाटों और मुसलमानों के बीच फैसला पंचायत आयोजित कर दोनों तबकों में सुलह कराने, मुकदमे वापस लेने और जाँच में फाइनल रिपोर्ट लगवाकर केस खत्म करने की बात कर रहे हैं, वह पीड़ितों को इंसाफ से वंचित करने और न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश है।

सांप्रदायिक हिंसा पीड़ित कैंपों का दौरा कर रहे रिहाई मंच के जाँच दल ने अपनी जाँच के पाँचवे दिन जारी रिपोर्ट में बताया है कि लगभग 9 हजार सांप्रदायिक हिंसा पीड़ित मुसलमान मलकपुर राहत शिविर कैम्प में खुले आसमान के नीचे बाँस की खपच्चियों पर प्लास्टिक बाँधकर भारी बारिश में रहने को मजबूर हैं और जहाँ अब तक 50 बच्चे जन्म ले चुके हैं अभी भी 250 महिलाएं गर्भवती हैं, उस कैम्प में रह रहे लोगों के लिये दो हफ्ते से अधिक समय में भी यूपी सरकार कोई बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं कर पायी लेकिन वन विभाग ने शिविर में रह रहे लोगों पर वन विभाग की जमीन पर कब्जा करने का मुकदमा दर्ज कर सरकार की मुस्लिम विरोधी रवैए को उजागर कर दिया है।

रिहाई मंच ने आरोप लगाते हुये कहा है कि कैराना रेंज के वन अधिकारी नरेन्द्र कुमार पाल ने हजारों मुसलमानों के खिलाफ थाना कैराना जिला शामली में मुकदमा अपराध संख्या 449/13 दर्ज करवाया है। जिसके चलते सांप्रदायिक हिंसा पीड़ित कैम्पों में रह रहे लोगों के सामने गम्भीर संकट पैदा हो गया है। जो लोकनिर्माण विभाग मंत्री शिवपाल यादव द्वारा पीड़ितों को कहीं भी बसाने के वादे को झूठा साबित करता है और पीड़ितों के जख्मों पर सपा सरकार द्वारा नमक छिड़कने जैसा है।

रिहाई मंच जाँच दल ने पाया कि मुसलमानों के खिलाफ संगठित हिंसा की तैयारी 7 सितंबर को नंगला मदौड़ में हुयी जाट महापंचायत से पहले ही कर ली गयी थी और 7 सितंबर की शाम को लौटने के बाद गाँवों में मुसलमानों के विरुद्ध हिंसक कार्यवाईयाँ शुरु कर दी गयी थीं। जाँच दल ने कहा है कि थाना फुगाना के लाख गाँव के शहजाद ने उनको बताया कि सात सितंबर की रात जाटों के पंचायत से लौटने के बाद गाँव में शोर शराबा बढ़ गया और सिकंदर जाट पुत्र इकबाल जाट ने गाँव के मंदिर से ऐलान किया कि सभी हिन्दू मन्दिर में इकट्ठा हो जायें ताकि मुसलमानों को मारना शुरु किया जाये। इस ऐलान के बाद जाट हथियारबंद होने लगे और मुसलमानों के खिलाफ नारेबाजी होने लगी। इसी गाँव के मोहम्मद मुस्तकीम (बदला हुआ नाम) ने बताया कि मुस्लिम विरोधी नारे सुनने के बाद जब उन्होंने गाँव के प्रधान बिल्लू जाट से सुरक्षा की गुहार की तब प्रधान और उसके साथी संजीव पुत्र झल्लड़ जाट ने मुकीम से कहा कि तुम सारे मुसलमान मर्द गाँव छोड़कर चले जाओ और औरतों को यहीं रहने दो कोई दिक्कत नहीं होगी।

जाँच दल के मुताबिक मुस्तकीम और उसकी पत्नी अकीला(बदला हुआ नाम) ने बताया कि 7 सितंबर की शाम को ही प्रधान बिल्लू के दरवाजे पर नीटू पुत्र कंवर पाल जाट और कोटेदार प्रमोद प्लास्टिक और शीशियों में केरासन तेल और तेजाब भरकर इकट्ठा कर रहे थे। 8 सितंबर सुबह 9 बजे मुसलमानों के खिलाफ शुरू हुयी हिंसा और आगजनी के चलते जान बचाकर चार दिनों तक गन्ने के खेत में छिपे और इस दरम्यान अपनी बारह साल की बेटी को सामूहिक बलात्कार और तेजाब छिड़कर की गयी हत्या में खो चुके इस परिवार ने बताया कि ग्राम प्रधान बिल्लू ने आगजनी की अगुवाई की और तेल भरी शीशियाँ लोगों व उनके घरों पर फेंकी जिनमें से एक शीशी का शिकार बनते-बनते खुद मुस्तकीम बचे। वे कहते हैं उन्होंने आखिरी बार अपनी बेटी को नीटू, संजीव समेत आठ दस लोगों के बीच घिरा देखा जो उसके कपड़े फाड़ चुके थे। वे कहते हैं कि चार दिन बाद थाना फुगाना में लाश की शिनाख्त के लिये बुलाये जाने पर कपड़ों से उन्होंने अपनी बेटी को पहचाना जिसको तीन टुकड़े करके तेजाब से जलाया और एक प्लास्टिक की पॉलीथीन में डाला गया था, उनकी बेटी की शव में कीड़े पड़ गये थे। लेकिन पुलिस ने बिना किसी लिखा पढ़ी के शव को दफना दिया।

लाख गाँव के पीड़ितों से तफ्तीश करने के दौरान रिहाई मंच जाँच दल ने पाया कि इस गाँव में इस तरह की और भी कई घटनाएं हैं जहाँ महिलाओं खासकर कम उम्र की बच्चियों के साथ सामूहिक बलात्कार व हत्याएं हुयी हैं, जिसे प्रशासन दबा रहा हैं। रिहाई मंच को कई गाँवों के पीड़ितों ने बताया कि उनके गाँवों के प्रधान जो जाट जाति से आते हैं, ने हर जगह इसी तरह की भूमिका निभाई।

रिहाई मंच ने माँग की है कि थाना फुगाना के पूरे पुलिसिया अमले को तत्काल निलम्बित कर जाँच के दायरे मे लाया जाये।

रिहाई मंच जाँच दल में शामिल अवामी कांउसिल फॉर डेमोक्रेसी एंड पीस के असद हयात, राजीव यादव, शरद जायसवाल, गुंजन सिंह, लक्ष्मण प्रसाद और शाहनवाज आलम ने बताया कि इसी रिलीफ कैम्प के ग्राम फुगाना निवासी आस मोहम्मद की पत्नी के साथ गाँव के ही सुधीर जाट, विनोद, सतिंदर ने उन पर हमला किया जिसमें उनके तीन बच्चे गुलजार(10), सादिक(8) और ऐरान(6) बिछड़ गये जिनका पता आज तक नहीं चला। उन्होंने बताया कि उन लोगों ने मेरे कपड़े फाड़ दिये और बुरी तरीके से दाँत काटे तभी बगल से एक और लड़की भागी जिसकी तरफ वे लोग लपके और मैं वहाँ से किसी तरह बच कर भाग पायी।

रिहाई मंच जाँच दल ने कहा है कि उनको कैराना कैम्प में रहने वाली फुगाना गाँव की शबनम ने बताया कि 8 सितम्बर को सुबह 9-10 बजे के करीब नारों की शोर सुनकर हम सब वहाँ से भागे और पास के लोई गाँव में एक घर में छुप गये, लेकिन मेरे दादा बूढ़े होने के चलते पीछे छूट गये। जिन्हें हमने अपने गाँव के ही विनोद, चसमबीर, अरविंद, हरपाल और अन्य द्वारा गड़ासे से तीन टुकड़े काट कर मारे जाते हुये देखा। फुगना थाने के गाँव लिसाढ़ जहाँ दो दर्जन से ज्यादा मुसलमान मारे गये की एक महिला ने बताया कि अख्तरी(65) को जब जिन्दा जलाया गया तब उनकी गोद में उनकी पोती भी थी, वो भी गोद में चिपके-चिपके ही जल गयी, जिन्हें दफनाते वक्त बच्ची को गोद से अलग नहीं किया गया। उस्मानपुर की इमराना की 12 वर्षीय बेटी रजिया जो गाँव के मदरसे में पढ़ रही थी, ने बताया कि मदरसे पर बहुत सारे जाटों ने गड़ासे और तलवारों के साथ हमला किया किसी तरह से रजिया अपने दो भाईयों जावेद(10) और परवेज(8) के साथ भागी और गन्ने के खेतों में पूरा दिन और पूरी रात छुपे रहे। रिहाई मंच जाँच दल को पीड़ितों ने बताया कि कई गाँवों में मदरसों पर हमला किया गया। जिसमें पढ़ने वाले कई बच्चे-बच्चियाँ आज तक गायब हैं।

रिहाई मंच के प्रवक्ताओं राजीव यादव और शाहनवाज आलम ने कहा कि मुसलमानों के खिलाफ हुयी इस संगठित हिंसा में जाटों की एकता राजनीतिक वफादारियों से ऊपर उठ कर काम कर रही थी। इसीलिये 5 सितम्बर को लिसाढ़ गाँव में आयोजित जाट बिरादरी के गठवारा खाप पंचायत जिसे 52 गाँवों के मुखिया और क्षेत्र के दबंग हरिकिशन बाबा ने बुलायी थी, उसमें कांग्रेस के पूर्व राज्य सभा सांसद व स्थानीय कांग्रेस विधायक पंकज मलिक के पिता हरिंदर मलिक भी मौजूद थे। इस पंचायत जिसमें मुसलमानों के जनसंहार की रणनीति बनी उसका संचालन शामली जिला के समाजवादी पार्टी सचिव डॉक्टर विनोद मलिक ने किया जिसमें हुकुम सिंह और तरूण अग्रवाल समेत कई भाजपा नेता भी शामिल थे। लेकिन हरिकिशन समेत सभी नेताओं पर धारा 120 बी के तहत आपराधिक षडयंत्र रचने का मुकदमा दर्ज है लेकिन आज तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया।

रिहाई मंच की मांग है कि ग्राम लिसाढ़, लाख, बहावड़ी, सिम्हालका, कुगड़ा, कुटबा, कुटबी आदि कई गाँवों में जहाँ मकानों को जलाया गया है उनके पीड़ितों को तुरन्त 5-5 लाख रूपये मुआवजा दिया जाये क्योंकि इसी प्रकार राज्य सरकार द्वारा ग्राम अस्थान जिला प्रतापगढ़ के पीड़ितों को अन्तरिम आर्थिक सहायता दी जा चुकी है।