शिकायतकर्ता रिहाई मंच प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने एसपी सिटी फैजाबाद कार्यालय में बयान दर्ज करा रखा अपना पक्ष
सपा विधायक तेज नारायण पाण्डेय और कोतवाल हरिहरनाथ मिश्रा पर मामले की लीपापोती का लगाया आरोप
शाहनवाज आलम ने मदनी मस्जिद के इमाम मौलाना बादशाह खान से की मुलाकात
लखनऊ 27 नवम्बर 2015। फैजाबाद के मदनी मस्जिद में 17 अगस्त 2015 को हुई आगजनी के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दर्ज रिहाई मंच की शिकायत पर फैजाबाद पुलिस स्टेशन में रिहाई मंच के प्रवक्ता व इस मामले के शिकायतकर्ता शाहनवाज आलम ने अपना बयान दर्ज कराया।
रिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने एसपी सिटी कार्यालय में दर्ज अपने बयान में कहा है कि मदनी मस्जिद में आगजनी रात को साढ़े ग्यारह बजे हुई जिसकी सूचना लोगों ने तत्काल पुलिस को दी लेकिन पांच मिनट की दूरी होने के बावजूद पुलिस वहां 12 बजे के बाद पहुंची। वहीं फायर ब्रिगेड के दफ्तर पर किसी ने भी फोन नहीं उठाया। जिसके कारण स्थानीय लोगों को ही आग भी बुझानी पड़ी। जो पुलिस और फायर ब्रिगेड की आपराधिक लापरवाही को साबित करता है। इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका इससे भी संदिग्ध हो जाती है कि जब पुलिस के आला अधिकारी मस्जिद में पहुंचे तो उन्होंने पूछताछ के नाम पर मस्जिद के इमाम मौलाना बादशाह को ही इस घटना के लिए संदिग्ध बताने की कोशिश करने के मकसद से इमाम के ही परिजनों, उनके बच्चों और खानदान के बारे में पूछताछ करनी शुरू कर दी। इस दौरान तत्कालीन कोतवाल हरिहरनाथ मिश्र की भूमिका सबसे खराब रही जो इस बात पर आमादा दिख रहे थे कि घटना को किसी भी तरह इमाम से जोड़ दिया जाए।
शाहनवाज आलम ने अपने बयान में दर्ज कराया कि पुलिस का यह व्यवहार यह साबित करता है कि ऐसा करके वह असली अपराधियों को पकड़ने में दिलचस्पी नहीं ले रही थी और जानबूझ कर असली अपराधियों को बचाना चाह रही थी। पुलिस के इस रवैया का अंदाजा इससे भी लग जाता है कि फैजाबाद में पिछले 3-4 सालों से ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं जिसमें धार्मिक स्थलांे को निशाना बनाया गया है लेकिन किसी भी मामले में आज तक अपराधी नहीं पकड़े गए। रिहाई मंच नेता ने अपने बयान में यह भी मांग की कि इस पूरे मामले तथा इसमें पुलिस की संदिग्ध भूमिका की सीबीआई से जांच कराई जाए क्योंकि ऐसी घटनाएं ही बड़ी साम्प्रदायिक घटनाओं का आधार बनती हैं।
शाहनवाज आलम ने मदनी मस्जिद के इमाम मौलाना बादशाह खान से मुलाकात की तथा मामले में अब तक हुई कार्रवाई के बारे में भी जानकारी हासिल की।
शाहनवाज आलम ने कहा कि इस पूरे मामले का राजनीतिक इस्तेमाल समाजवादी पार्टी के विधायक तेज नारायण पाण्डेय उर्फ पवन पाण्डेय को फिर से मंत्री बनाने के लिए भी किया गया। जिसके तहत मस्जिद में आगजनी की घटना पर मुख्यमंत्री से मुलाकात करने के नाम पर शहर के सपा नेताओं, कुछ कथित उलेमाओं और कुछ व्यवसाई और वकीलों, जो उस दिन मौलानाओं की भेष भूषा में थे, को अखिलेश यादव से मिलवाया गया जहां मस्जिद में हुई आगजनी की घटना की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों को पकड़े के बजाए पवन पाण्डेय को फिर से मंत्री बना देने के लिए सिफारिशें की गईं। उन्होंने कहा कि इस घटना की विवेचना तो पुलिस और आयोग को करनी है लेकिन इस पूरे मामले का इस्तेमाल कथित मुस्लिम नेताओं ने सपा विधायक को मंत्री बनाने के लिए कैसे किया इसकी जांच खुद मुस्लिम समाज के ईमानदार सामाजिक और धार्मिक नेतृत्व को करनी चाहिए।