रेल बजट का बडगेट
रेल बजट का बडगेट
जुगनू शारदेय
बजट का मतलब क्या होता है । अंग्रेजी भाषा में यह बडगेट होता है । बड़े बड़े विद्वानों ने तय किया कि यह राज्य या देश की राजनीतिक नीतियां होती हैं । घोघाप्रसाद वसंतलाल ऐसा नहीं मानते । उन्होने बड़ी मुश्किल से तय किया कि बजट का मतलब वह नहीं होता जो हम समझते हैं । जब हम वह नहीं समझते जो बजट का असली मतलब होता है तो निर्वहन कुमार कहते हैं कि रेल बजट से उन्हें बड़ी निराशा होती है ।
रेल बजट निराशा के लिए होता ही है । रेल बजट से आशा की परंपरा उसी दिन से खत्म हो गई जब किसी रेल मंत्री ने तय किया कि हम यात्री भाड़ा नहीं बढ़ाएंगे । माल भाड़ा भी अब नहीं बढ़ता । इतना ज्यादा बढ़ा हुआ है कि पता ही नहीं चलता कि कितना बढ़ा हुआ है । हम तो इतना जानते हैं नीतीश कुमार जब रेल मंत्री होते थे तो उन्होने एक ऐसा फारमूला निकाला था कि पता ही नहीं चलता था कि माल भाड़ा बढ़ा । उस फारमूले के तहत लालू प्रसाद ने अनाज की ढुलाई पर बार बार भाड़ा बढ़ाया । अभी तो यही लगता है कि उन्होने कोई माल भाड़ा भी नहीं बढ़ाया । बाद में पता चला कि नीतीश फारमूला से भाड़ा बढ़ा हुआ है ।
घोघाप्रसाद वसंतलाल को ममता बहना के बडगेट से कोई निराशा नहीं है । कितना झूठा आरोप है हमारी ममता बहना के ऊपर कि उनका बडगेट पश्चिम बंगाल के
चुनाव के लिए है । गलत , सौ फी सदी गलत बात । अगले साल वाले यूपी के चुनाव का भी उन्होने ध्यान रखा है । यह है हमारी बहना की अक्ल कि एक ही रेल से दो निशाना कि ममतामयी मैया सोनिया गांधी भी खुश । रायबरेली के कोच कारखाने से तीन महीने के अंदर ही कोच निकलना शुरू हो जाएगा । मधेपुरा का कोच कारखाना ,छपरा का पहिया कारखाना कहां हैं । यह जब बजट आएगा तो उसमें इसका जिक्र होगा । यह तो बडगेट है ।
यात्री अब बेफिकर रहे । आपकी सुरक्षा का पूरा इंतजाम है । रेल की पटरी से ले कर रेल की सुरक्षा का प्रबंध है या नहीं – यह तो बजट की बात है । लेकिन इस बडगेट में दावा है कि मार्च में ही लगभग 16 हजार पूर्व सैनिकों की बहाली हो जाएगी । ममता बहन के पास बजट भी होता है या किसी रेल अधिकारी की समझ होती है कि जम्मू एवं कश्मीर में पुल कारखाना बनाया जएगा । मतबल कि वहां जितने पुल बनने वाले हैं उसका ढांचा पहले से तैयार होगा ।
हमारे देश में कृप्या और प्रस्ताव जैसे दो महान शब्द भी होते हैं । सो ममता बहन के बडगेट में बहुत सारे प्रस्ताव हैं । सब के सब बंगाल में हैं । होना भी चाहिए । ममता बहन के होते ना होता तो कब होता । आपसी भिड़ंत से बचने वाले उपकरण दक्षिण और दक्षिण केंद्रीय लगाए जाएंगे । बहनों को इसकी बड़ी चिंता होती है कि बच्चे ठीक से रहे । उधम न मचाएं । रेल को उत्पात मचाने वाले राज्यों से बड़ी तकलीफ होती है । बहना ने कहा कि जो राज्य उधम नहीं मचाएंगे उन्हें दो रेलगाड़ियां दी जाएंगी ।
हमें तो कुछ नहीं चाहिए बहना । हम तो चाहते हैं कि रेल गाड़ियां सिर्फ 24 घंटे देर से चलें ताकि हमें जहां पहुंचना हो वहां समय पर पहुंच जाए ।


