रेल बजट को आम बजट में मिलाने की माकपा ने की आलोचना
रेल बजट को आम बजट में मिलाने की माकपा ने की आलोचना
रेल बजट को आम बजट में मिलाने की माकपा ने की आलोचना
नयी दिल्ली। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (माकपा) ने रेल बजट को आम बजट में शामिल किये जाने की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि सरकार ने संसद की राय लिए बगैर अपने मन से यह एकतरफा फैसला लिया है, जिसका मकसद रेलवे का निजीकरण करना है।
आज यहाँ जारी एक विज्ञप्ति में पार्टी पोलित ब्यूरो ने कहा कि सरकार ने यह फैसला विवेक देबोराय समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया है जिसने रेलवे का निजीकरण करने की अनुशंसा की है।
रेलवे का निजीकरण नहीं होना चाहिए
पार्टी ने कहा है कि रेलवे बजट संसद में पेश होता है तो उस पर विस्तृत विचार-विमर्श का अवसर मिलता है और उसकी समीक्षा होती है एवं उसके वित्तीय प्रावधानों, खर्च आदि पर बहस होती है। रेलवे जनता के लिए परिवहन की व्यवस्था है और लाखों लोग इसका इस्तेमाल करते है इसलिए इसका निजीकरण नहीं होना चाहिए लेकिन रेलवे बजट का आम बजट में विलय निजीकरण की दिशा में एक कदम है।
पार्टी ने कहा है कि इस कदम से रेल किराये और बढ़ेंगे तथा आम आदमी पर बोझ बढेगा और अमीर तथा गरीबों के बीच खाई बढ़ेगी।


