आज सुरेंद्र प्रताप सिंह का जन्म दिन है 3 दिसंबर 1947

दिल मेरा पटना का इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान हो गया । यहां मरीज कतार में खड़ा खड़ा संतोषी माता हो जाता है । एक जमाना हो सकता था कि हम ही नहीं , पूरे देश के बारे में दावा करना तो उचित न होगा ,बिहार के सारे पत्रकार मुख्य मंत्री मिलन रोग के शिकार जरुर हो जाते । यह रोग जब लालू जी मुख्य मंत्री हुआ करते थे ,तब लगा था बिहार के पत्रकारों को । लालू जी को यह रोग लगा हुआ था - बोली रोग । उनकी बोली के बल पर अखबार से ज्यादा खबरिया चैनल चलते थे । उसी लालू जी ने तय किया है कि अगले छे महीने तक ना बोलेंगे । इतना जरूर कह दिया है कि बिहार के बारे में ना बोलेंगे । और तो और रचनात्मक विपक्ष की भूमिका का निर्वहन करेंगे । लालू जी इसके पहले भी सरकार न चलाने का निर्वहन कर चुके हैं । लालू जी जब सरकार नहीं चलाते थे और श्रीमती सरकार चलती रहती थी तब वह श्रीमती सरकार के प्रवक्ता होते थे ।
यह नहीं होते थे तो रेल को चमकाते थे । लालू जी के हर काम में एक ही चीज होती थी , उनका हर बात पर बोलना । वह बोले तो खबर बन गई । ना बोले तो भी खबर बन गई । कैसे कटेंगे पत्रकारों के छे महीने जब लालू जी बिहार के बारे में नहीं बोलेंगे । भला हो केंद्र सरकार का कि लालू का चारा घोटाला बच्चा जी हो गया है । पत्रकारों के लिए नीरा राडिया का टेप ही अच्छा हो गया है । खबर ही खबर है । इसमें सब शामिल हैं । कहते हैं कि सबके दिन बदलते हैं । लालू जी का भी दिन बदलेगा । उनका सुभाषित अखबारों में रहेगा । तब तक नीरा राडिया के बोल बचन का ही सहारा है । बची खुची कसर बिहार में मुख्य मंत्री नीतीश कुमार जी पूरी कर देंगे । पर डर लगता है कि कहीं बड़े भाइ के रास्ते पर चले तो यह भी कह सकते हैं कि छे महीने तक बिहार के विकास के अलावा कुछ नहीं बोलेंगे । सिर्फ केंद्र सरकार से भिक्षा मांगने के कर्त्तव्य का निर्वहन करेंगे ।
इस बार जैसे लालू जी में बदलाव आया है वैसे ही मुख्य मंत्री नीतीश कुमार में भी बदलाव आया है । इन दोनों के बदलाव से उप मुख्य मंत्री सुशील कुमार मोदी बहुत परेशान हैं । क्या जमाना होता था जब लालू जी मुख्य मंत्री या श्रीमती सरकार के प्रवक्ता होते थे और मोदी जी नेता विरोधी दल होते थे । सिर्फ बोलने के लिए मोदी जी सुबह दिल्ली जा कर शाम को लौट आते थे । तब नीतीश कुमार दिल्ली में ही पाए जाते थे । वह उनका मौन व्रत काल था । बोलते भी थे तो कोई सुनता नहीं था । खुद ही मानते हैं कि 11 साल लगातार बोलते रहे तो बिहार के लोगों ने सुनना शुरु किया । इस बार कुछ ज्यादा ही सुन लिया कि बोलती ही बंद हो गई लालू जी की ।
हे प्रभू ज्ञानदाता , लीजिए हमको शरण में , बना रखिए मन को भरम में कि मुख्य मंत्री जी मुख्य मंत्री की तरह ही बोलें , एक दम अध्यापकों की तरह बोलाधारी ना बनें । उप मुख्य मंत्री जी पटना में ही बोलें , नागपुर जा कर ना बोलें क्योंकि अगर लालू जी ना बोलेंगे तो आप क्या बोलेंगे । हम किसी तरह कतार में खड़े खड़े जय नीरा माता का टेप गाते रहेंगे – अपनी दुकान चलाते रहेंगे ।