नई दिल्ली। लीजिए भारतीय संस्कृति को पश्चिमी संस्कृति से खतरा है, यह शोर तो भारत में मचता ही रहता है, अब यूनान में शोर मच रहा है कि पश्चिमी संस्कृति खतरे में है। ऐसा शोर मचाने वाले कोई और नहीं यूनान के प्रधानमंत्री एलेक्सिस सप्रास हैं।
यूनान के प्रधानमंत्री ने कहा है कि पश्चिमी देशों में शरणार्थियों के हमलों से पश्चिमी संस्कृति के समाप्त होने का ख़तरा उत्पन्न हो गया है।
रेडियो ईरान ने खबर दी है कि यूनान की आना यूनान समाचार एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार, यूनान के प्रधानमंत्री एलेक्सिस सप्रास ने इस बात की घोषणा की है कि यूरोपीय देशों में पलायनकर्ताओं के आक्रमण से पश्चिमी संस्कृतिक के धराशायी होने का ख़तरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि ईजियन सागर, न केवल यूरोप पहुंचने के लिए शरणार्थियों के लिए ख़तरनाक मार्ग है बल्कि इस रास्ते से यूरोपीय संस्कृतिक भी तबाह हो जाएगी।
यूनानी प्रधानमंत्री का कहना था कि सरकार पलायनकर्ताओं के दुखों को कम करने के प्रति प्रतिबद्ध है किन्तु पलायनकर्ताओं की उपस्थिति के विध्वंसक प्रभावों को भी दृष्टिगत रखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि यूरोप और यूरोपीय देशों की ओर पलायन करने वालों की संस्कृतिक में बहुत अंतर है।
प्रधानमंत्री एलेक्सिस सप्रास ने यूरोप तथा यूनान में चरमपंथी विचारधाराओं को सीमित करने की मांग की है। यूनान के प्रधनमंत्री एलेक्सिस सप्रास ने इस देश की संसद में घोषणा की थी कि वे इस मानवीय त्रासदी को हल करने के लिए यूरोप की अक्षमता के कारण लज्जित हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2015 के आरंभ से अबतक पांच लाख पलायनकर्ता समुद्री रास्ते से यूनान में पहुंच चुके हैं जिनमें अधिकांश मुसलमान हैं।