लोकतंत्र के लिये शर्मनाक बेगुनाहों का जेल में रहना और हत्यारों का आजाद घूमना- हाफिज फैयाज
लोकतंत्र के लिये शर्मनाक बेगुनाहों का जेल में रहना और हत्यारों का आजाद घूमना- हाफिज फैयाज
‘अवैध गिरफ्तारी विरोधी दिवस’ मनाते हुये
रिहाई मंच ने बेनाहों की रिहाई की माँग की
बेगुनाहों की रिहाई आंदोलन को तेज करना
इंसाफ पसन्द लोगों की जिम्मेदारी है - संदीप पांडेय
लखनऊ 16 दिसंबर 2013। आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट तस्दीक करती है कि उत्तर प्रदेश की कचहरियों में हुये सिलसिलेवार विस्फोटों के आरोपी मौलाना खालिद को आज के ही दिन 16 दिसंबर 2007 को मडि़याहूं जौनपुर से अपहरण कर 22 दिसंबर को एसटीएफ ने बाराबंकी से झूठी गिरफ्तारी का दावा करते हुये आतंकवाद के फर्जी आरोप में फँसा दिया। लेकिन बावजूद इसके प्रदेश की सपा सरकार ने लम्बे समय तक रिपोर्ट को दबाए रख कर उन्हें फँसाने वालों को बचाने की कोशिश की जिससे पुलिस और आईबी अधिकारियों के हौसले इतने बुलंद हो गये कि उन्होंने खालिद मुजाहिद की हत्या कर दी। जिस पर पुलिस व आईबी के अधिकारियों के खिलाफ नामजद मुकदमा होने के बावजूद भी कार्यवाही नहीं हुयी, ऐसे दौर में रिहाई मंच ने मौलाना खालिद के गिरफ्तारी के दिन को ‘अवैध गिरफ्तारी विरोधी दिवस के रूप में मनाते हुये बेगुनाहों की रिहाई के आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया।
रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि खालिद के साथ ही फर्जी तरीके से गिरफ्तार कर कचहरी विस्फोट मामले में फँसाये गये तारिक कासमी द्वारा 12 जुलाई को सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त जवाब से स्पष्ट हो जाता है कि 19 अप्रेल 2013 को जिस दिन खालिद मुजाहिद की हत्या हुयी थी, उस दिन उनकी तबियत खराब नहीं थी। जैसा कि मुख्यमंत्री और सरकारी अमले द्वारा उनकी हत्या को बीमारी से हुयी मौत बताने के लिये तर्क दिया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि आरटीआई से प्राप्त जवाबों में साफ बताया गया है कि खालिद मुजाहिद द्वारा स्वास्थ्य सम्बंधी ऐसी कोई परेशानी नहीं बतायी गयी कि जिसमें ईसीजी/ अल्ट्रासोमोग्राफी की आवश्यकता रही हो। इसी तरह खालिद मुजाहिद की फैजाबाद पेशी पर जाने का समय जीबी पर 9 बज कर 35 मिनट दर्ज है जबकि जेल अभिलेख के मुताबिक डॉ. प्रदीप बिजलानी 9 बजकर 35 मिनट पर उच्च सुरक्षा बैरक में आये। जाहिर है ऐसे में सरकार का यह दावा कि डॉक्टर ने खालिद की जाँच की थी गलत है। क्योंकि खालिद के अपने बैरक से बाहर निकलने और डॉक्टर के दाखिल होने दोनों का समय एक है। जो अगर जाँच हुयी होती तो सम्भव नहीं था।
‘अवैध गिरफ्तारी विरोधी दिवस’ पर बोलते हुये मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित, सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संदीप पाण्डे ने कहा कि आज का दिन सिर्फ इस सवाल पर लड़ने वालों के लिये ही नहीं बल्कि हमारी सरकारों के लिये भी ‘अवैध गिरफ्तारी दिवस’ के रूप में है। क्योंकि खालिद मुजाहिद की अवैध गिरफ्तारी की गयी थी इस बात को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित आरडी निमेष रिपोर्ट कहती है, जिसे रिहाई मंच के 121 दिन के धरने के दबाव में सरकार को स्वीकारना व सार्वजनिक भी करना पड़ा। आज के दिन जब बेगुनाह खालिद मुजाहिद हमारे बीच नहीं हैं और उन पर अब भी आतंकवाद का झूठा आरोप लगा है। ऐसे में हम सब इंसाफ पसन्द अवाम का कर्तव्य हो जाता है कि उनके और प्रदेश ही नहीं देश के विभिन्न जेलों में बद सभी बेगुनाहों के लिये संघर्ष को और तेज किया जाये।
आजमगढ़ के तारिक कासमी (जिनकी एसटीएफ द्वारा की गयी झूठी गिरफ्तारी पर आरडी निमेष रिपोर्ट सवाल उठा चुकी है) के चचा हाफिज फैयाज आजमी ने कहा कि आज जब साफ हो चुका है कि तारिक और खालिद की गिरफ्तारी झूठी थी तब भी तारिक का जेल में रहना और खालिद के हत्यारे जिनमें उन्हें फँसाने वाले भी शामिल हैं का आजाद घूमना लोकतंत्र के लिये शर्मनाक है।
इस अवसर पर बोलते हुये मुस्लिम मजलिस के जैद अहमद फारूकी, भारतीय एकता पार्टी के अध्यक्ष सैयद मोईद अहमद ने कहा कि पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ द्वारा जिस तरह आतंकवाद के आरोप में बंद बेगुनाह मुस्लिम युवकों की रिहाई पर केंद्र सरकार की मंजूरी को जरूरी बताया गया है, वह संविधान की धारा 321 की भावना (जो कानून और व्यवस्था पर राज्यों को अधिकार देता है) के खिलाफ है। जिसके विरूद्ध राज्य सरकार को सर्वोच्च अदालत में अपील करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हाईकोर्ट के इस फैसले के आलोक में संविधान की व्याख्या की जाने लगेगी तो भारत का संघीय ढाँचा ही ध्वस्त हो जायेगा। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक पार्टियाँ एनसीटीसी के सवाल पर संघीय ढाँचे के ध्वस्त हो जाने का खतरा दिखाते हुये इस बिल का विरोध करती रही हैं, उन्हें इस मसले पर भी अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले से भी राज्य और केंद्र के बीच के संघीय सम्बंध को खतरा उत्पन्न हो गया है जिस पर सिर्फ इस आधार पर पार्टियों की खामोशी कि इसमें मुस्लिम समुदाय के बेगुनाह युवकों का भविष्य जुड़ा है, निहायत ही साम्प्रदायिक रवैया है।
इस अवसर पर इनायतुल्ला खान, कमर सीतापुरी, जुबैर जौनपुरी, अब्दुल हलीम सिद्दीकी, शाने इलाही, गुफरान सिद्दीकी, तारिक कासमी के चचा हाफिज फैयाज, इरफान शेख, वासिफ शेख, मोहम्मद वसी, अब्दुल मोईद कासमी, रिजवान सिद्दीकी, अशरफ खान, राजू सोनकर, राजीव यादव और शाहनवाज आलम मौजूद थे।


