वक्त की चुनौती और धैर्य की परीक्षा !
वक्त की चुनौती और धैर्य की परीक्षा !
मोहन श्रोत्रिय
"बेमानी है उलझना
उन लोगों से
जो दावे करते हैं चाहे
साझे सरोकारों के।
समय कठिन है बेशक
और तय है यह भी
कि यह और कठिन होता
चला जाएगा। और तब बहुत
मुमकिन है
अमल करने लग जाएं वे भी
खुद के अहर्निश प्रवचनों पर।
कौन नहीं जानता
असल कसौटी होती है
वैचारिक निष्ठाओं की
#कहे और #किए की एकता ही।
तो इंतज़ार करें हालात के
पक जाने का। और सिर्फ़
साक्षी भाव बनाए रखें
तब तक तो अवश्य ही।"


