वैकल्पिक मीडिया को खड़ा करने के लिए आपने क्या किया?
नए साल की शुभकामनाएं और एक व्यक्तिगत अपील

प्रिय मित्रों,
सबसे पहले आप सभी को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं. उम्मीद है कि नए वर्ष में एक बेहतर देश और समाज बनाने की लड़ाई और मजबूत होगी. आप सभी पढ़ने-लिखनेवाले लोगों के लिए अपनी कामना है कि यह वर्ष आपकी सृजनात्मकता को नयी ऊंचाई दे. आपकी कलम देश के गरीबों, बेजुबान और हाशिए पर पड़े लोगों की आवाज़ बने और संघर्ष और रचना की यात्रा इसी तरह आगे बढ़ती रहे.

नए साल में मेरी आपसे एक व्यक्तिगत अपील भी है और मुझे पूरा विश्वास है कि आप उसपर ध्यान जरूर देंगे. जैसाकि आप सभी जानते हैं कि गुजरे साल में कारपोरेट मीडिया की विश्वसनीयता और साख को और बड़े झटके लगे हैं. पेड न्यूज और राडियागेट ने कारपोरेट मीडिया को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. आश्चर्य नहीं कि मुख्यधारा का कारपोरेट मीडिया न सिर्फ बड़ी पूंजी और सत्ता का भोंपू बनता जा रहा है बल्कि अपनी विश्वसनीयता भी गंवाता जा रहा है.

इस बारे में आपसे लगातार संवाद चलता रहा है. पिछले कई वर्षों से यह हम सभी लोगों के लिए यह बड़ी चिंता का विषय है. इस साल यह चिंता कुछ हद तक निराशा और हताशा में भी बदलने लगी है. ऐसा लगने लगा है कि कारपोरेट मीडिया में बदलाव संभव नहीं है. उल्टे इस बात की आशंका बढ़ती जा रही है कि आनेवाले वर्षों में कारपोरेट मीडिया में स्थितियां और खराब ही होंगी.

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या किया जाए? आप में से बहुतेरे लोग एक सवाल अक्सर करते हैं कि इस सबका विकल्प क्या है? मेरा मानना है कि हमें दो स्तरों पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है. पहली यह कि कारपोरेट मीडिया से बहुत उम्मीद न करते हुए भी उसे मनमानी करने के लिए छोड़ा नहीं जा सकता है. तात्पर्य यह कि हमें कारपोरेट मीडिया के विचलनों पर सवाल खड़ा करते हुए और उसकी आलोचना करते हुए एक ओर उसका भंडाफोड करते रहना चाहिए और दूसरी ओर, उसपर अपने तौर-तरीकों को बदलने का दबाव बनाये रखना चाहिए.

लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि वैकल्पिक मीडिया को खड़ा किया और बढ़ावा दिया जाए. मेरी इस बारे में बिल्कुल साफ समझ है कि अब वैकल्पिक मीडिया के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. वैकल्पिक मीडिया से ही मुख्यधारा के कारपोरेट मीडिया पर भी दबाव बनाया जा सकता है.

मेरी आपसे सभी से अपील है कि आप वर्ष 2011 को वैकल्पिक मीडिया का साल बनाने के लिए काम करें. इसके लिए जरूरी है कि जिस तरह से आप मुख्यधारा के अख़बारों और पत्रिकाओं, टी.वी. चैनलों आदि के लिए हर महीने पैसे खर्च करते हैं, वैसे ही वैकल्पिक मीडिया की पत्र-पत्रिकाओं, वेबसाइटों और वैकल्पिक सिनेमा के लिए भी कुछ पैसे जरूर खर्च करें. इसके बिना वैकल्पिक मीडिया खड़ा नहीं हो सकता है.

हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओँ में ऐसी बहुत सी पत्र-पत्रिकाएं हैं. इन पत्र-पत्रिकाओं में एक पत्रिका है : “समकालीन जनमत”. मेरी आपसे व्यक्तिगत अपील है कि आप वैकल्पिक मीडिया को मजबूत करने के लिए ‘समकालीन जनमत’ की वार्षिक सदस्यता जरूर लें. आप उसे विज्ञापन दिलाने में भी मदद कर सकते हैं. आप उसे आर्थिक सहयोग भी दे सकते हैं.

जनमत की वार्षिक सदस्यता सिर्फ 150 रूपये है और अगर आप इलाहाबाद से बाहर का चेक भेज रहे हैं तो उसमें 25 रूपये और जोड़ दें. इसके अलावा आप पांच सौ रूपये से ऊपर की आर्थिक सहायता भी भेज सकते हैं. आप अपना सहयोग ड्राफ्ट या चेक ‘समकालीन जनमत’ के नाम से बनवा के इस पते पर भेज सकते हैं. पता है: मीना राय, प्रबंध संपादक, समकालीन जनमत, 171, कर्नलगंज (स्वराज भवन के सामने), इलाहबाद-211002.

मुझे उम्मीद है कि आप मेरी इस अपील पर जरूर गौर करेंगे. एक बार फिर नए साल की शुभकामनाओं सहित.

आपका,
आनंद प्रधान