लखनऊ। “चिंगारी कोई भड़के, तो सावन आग बुझाये/ सावन जब आग लगाये, उसे कौन बुझाये”। कुछ ऐसा ही जटिल प्रश्न आजकल उत्तम प्रदेश बनने के लिए युद्ध स्तर पर जुटे उत्तर प्रदेश में पूछा जा रहा है।

सरकारों, जनप्रतिनिधियों और लोकसेवकों के भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिये सूबों में लोकायुक्त की नियुक्ति की जाती है। लेकिन उप्र में फर्जी शासनादेश पर निजी संस्था को विधायक निधि से दिये जाने वाले करोड़ों रुपये के काम में हुये महा घोटाले में विधायकों को क्लीनचिट देकर लोकायुक्त सवालों से घिर गये हैं।

शर्मनाक सच सामने आने पर लोकायुक्त जैसी संस्था से भी आम जनता का विश्वास उठ गया है। लेकिन इन विधायकों को क्लीनचिट की हड्डी भी अब लोकायुक्त के गले में अटकती नजर आ रही है। लखनऊ से प्रकाशित होने वाली जानी-मानी पत्रिका प्रखर विचार के सम्पादक और वरिष्ठ पत्रकार एस. ए. अस्थाना ने जनहित याचिका दायर कर विधायक निधि की लूट में चार माननीयों, छह नौकरशाहों के साथ-साथ लोकायुक्त को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। अस्थाना ने उन लोगों को भी अदालत में तलब कर कानून की चौखट तक पहुँचाने का प्रयास भी किया है जिन्होंने पहले शिकायत और बाद में क्लीनचिट दिलाने का ठेका लिया है।
बताया जातास है कि समाजवादी पार्टी के सरेनी विधायक देवेन्द्र प्रताप सिंह ने एक करोड़, बछरावां विधायक रामलाल अकेला ने 1.26 करोड़ और हरचन्दपुर के विधायक सुरेन्द्र विक्रम सिंह “पंजाबी” ने 1.36 करोड़ तथा ऊँचाहार के विधायक डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय ने लाखों रुपये के काम कार्यदाई संस्था को सौंपने की संस्तुति की है। जबकि बताया जाता है कि सांसद व विधायक निधि के लिये निर्धारित निर्देशिका में केवल काम की सिफारिश की जा सकती है लेकिन किस संस्था से यह काम कराया जाय इसकी संस्तुति नहीं। विधायकों ने प्रक्रिया का उल्लंघन करके यह खेल खेला। मामले में शुरू-शुरू में लोकायुक्त ने तेजी दिखाई लेकिन बाद में सभी विधायकों को क्लीनचिट दे दी गई। इसी क्लीनचिट को लेकर सम्पादक शिव आसरे अस्थाना ने एक जनहित याचिका माननीय उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ में दायर की है।

श्री अस्थाना ने मामले में प्रमुख सचिव गृह, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास, आयुक्त ग्राम्य विकास, डीएम रायबरेली, सीडीओ रायबरेली, पीडी रायबरेली के साथ-साथ सरेनी विधायक देवेन्द्र प्रताप सिंह, हरचन्दपुर विधायक सुरेन्द्र विक्रम सिंह, ऊंचाहार विधायक डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय तथा बछरावां विधायक रामलाल अकेला को भी पार्टी बनाया गया है। एसए अस्थाना के अनुसार उन्होंने इनके अलावां अभियन्ता डीआरडीए शैलेन्द्र त्रिपाठी, अशोक त्रिपाठी, सोनकर और मलिकमऊ आइमा के प्रधान मनोज पाण्डेय को भी पार्टी में शामिल किया।

श्री अस्थाना ने बताया कि स्टेट काउंसिल ने छह अधिकारियों की नोटिसें रिसीव कर ली है बाकी को डाक द्वारा भेज दिया गया है।