नई दिल्ली। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 40 मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस पी सदाशिवम केरल के राज्यपाल बनाए गए हैं। कांग्रेस ने उनकी नियुक्ति का तगड़ा विरोध किया है।
बुधवार को कांग्रेस प्रवक्ता शोभा ओझा ने एक प्रेस वार्ता में एक क्लिपिंग पेश की जिसमें अरुण जेटली कह रहे हैं- दो प्रकार के जज होते हैं, एक वे जो कानून जानते हैं, दूसरे वे जो कानून मंत्री को जानते हैं। इसी क्लिपिंग में नितिन गडकरी कह रहे हैं कि रिटायरमेंट के बाद कम से कम दो वर्ष का वेटिंग पीरियड अनिवार्य होना चाहिए जिसमें जजों को ट्रिब्युनल्स और न्यायिक आयोगों में नियुक्त न किया जाए।

उधर बीएसएफ व उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह ने ट्वीट करके कहा है कि अवकाश ग्रहण करने के बाद दो वर्ष का कूलिंग पीरिड अनिवार्य करने की उनकी याचिका जस्टिस पी सदाशिवम ने क्यों खारिज कर दी थी अब समझ में आया। उन्होंने कहा है कि सदाशिवम द्वारा राज्यपाल का पद ग्रहण करने से उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की गरिमा को ठेस पहुंचाई है।

"Pre-Retirement judgements are influenced by desire of post retirement jobs" Is Mr Jaitley talking about #Sathasivam? http://t.co/2HHOTKOJlp

— Ajay Maken (@ajaymaken) September 3, 2014

एनडीटीवी से भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम ने कहा कि केरल के राज्यपाल के रूप में मेरी नियुक्ति मेरे अनुभव का उपयोग करने का अवसर है। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अमित शाह प्रकरण उन्होंने मेरिट के आधार पर निर्णय दिया था।
जस्टिस सदाशिवम ने इस मामले मे रिकॉर्ड कायम किया है। वह ऐसे पूर्व मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं जो राज्यपाल बनाए गए हैं। उन्होंने इससे पहले एक और रिकॉर्ड कायम किया था। वह हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का पद धारण किए बिना ही सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बनाए गए थे।
तब जस्टिस कबीर की आलोचना की थी सदाशिवम ने
मजे की बात यह है कि चीफ जस्टिस रहते हुए पी. सदाशिवम ने अपने पू्र्व चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर के उस फैसले की आलोचना की थी जिसमें कबीर ने जेपी एसोसिएट्स कंपनी को राहत दी थी। सदाशिवम ने कहा था कि जिस तरीके से अंतरिम आदेश पारित किया गया है, हम उसे मंजूरी नहीं देते। इस तरह का आदेश पास नहीं किया जाना चाहिए था। गौरतलब है कि 4 मई 2012 को जेपी पर गलत तरीके से सीमेंट प्लांट लगाने के आरोप में हिमाचल हाईकोर्ट ने कंपनी पर 100 करोड़ का जुर्माना लगाया था। फैसले के मुताबिक पैसे 25 करोड़ की चार किश्तों में जमा किए जाने थे। वहीं 26 नवंबर को जेपी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की लेकिन जस्टिस पटनायक ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जब ये मामला अल्तमस कबीर की अदालत में आया तो जुर्माने की अगली किश्त के भुगतान पर 8 मई तक रोक लगा दी गई थी। घोर आश्चर्य है कि जस्टिस कबीर के फैसले की आलोचना करने वाले सदाशिवम अब न केवल अपने राज्यपाल बनने को उचित ठहरा रहे हैं बल्कि अमित शाह मामले में मेरिट के आधार पर निर्णय देने की बात कह रहे हैं।

Between Disputes Justice P Sathasivam appointed Governor of Kerala, विवादों के बीच केरल के राज्यपाल बनाए गए जस्टिस पी सदाशिवम ,
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