विस्थापन का दंश - किसान से मजदूर बनते लोग
विस्थापन का दंश - किसान से मजदूर बनते लोग
१२ दिन का अनशन हुआ ख़त्म
जिला प्रशासन से सकारात्मक सहयोग मिला, सफल रहा अनशन – संजय नामदेव
सिंगरौली। चंदुली जिला सिंगरौली के विस्थापित बीरबल पिता फुलचंद कहते हैं कि विस्थापन ने हम लोगों का जीवन जहरीला कर दिया है. कम्पनियां आती हैं, हम लोगों के न चाहते हुए भी हम लोगों का घर जमीन सब कुछ थोड़े से पैसे में कंपनी का हो जाता है और हम किसान से मजदूर हो जाते हैं.
जो कल तक अपने जमीन के मालिक हुआ करते थे और अपनी मर्जी की फसल उगाकर अपना जीवनयापन किया करते थे, आज दो वक्त की रोटी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, क्योंकि अब वह किसान नहीं मजदूर बन गए हैं. सिंगरौली के जिला बनने से भले ही थैलीशाहों की थैलियां भर रही हों, उनके जीवन में उजाला आया हो रहा हो, लेकिन गरीब किसान को आज भी हक के लिए लड़ना पड़ रहा है. अनशनकारियों द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार हिंडालको कैपटिव पावर पालान्ट बरगवां जिला सिंगौली म.प्र. कंपनी द्वारा भूमि अधिगृहित किया गया था और ओड़गड़ी धौडर वरैनिया व गिधेर के विस्थापितों और भूविस्थापितों को वर्ष २००७ में कहा गया था कि आप लोगों को जमीन के बदले जमीन घर के बदले प्लाट और विस्थापितों को स्थाई नौकरी दिया जाएगा. लेकिन आज तक इन विस्तापितों को स्थाई नौकरी नहीं मिली, जमीन की कीमत ९६००० रुपए प्रति एकड़ के दर से भू-आर्जन अधिनियम १८९४ की धारा ११ अधीन अवार्ड किया गया और नौकरी के नाम पर कंपनी के अधीन कंपनी/ ठेकेदार के अधीन सामान्य न्यूनतम मजदूरी पर काम दिया गया.
सपना दिखा कर ठगे गए विस्थापितों ने अपनी व्यथा हाकिमों को सुनाते- सुनाते थक कर १६-६-२०१५ से आमरण अनशन पर बैठने का फैसला लिया. बताया जाता है की दो महिला अनशनकारी और नारायण दास विश्वकर्मा की तबियत बिगड़ गई. लेकिन 12 दिनों से बैठे अनशनकारियों की सुध लेने वाला कोई नहीं आया. अपने ग्रामीण मजदूर साथियों को हलकान देख संजय नामदेव (उर्जांचल विस्थापित कामगार यूनियन) शैलेन्द्र सिंह चौहान ( शिवसैनिक ठोको के संयोजक) विकास (मयूर संगठन) राम्लाल्लू गुप्ता (मार्क्सवादी कमुनिस्ट) अनिल द्विवेदी (आप) साथ आकर अनशन में शामिल हो गए.
किसने क्या कहा
मंतोहिया देवी निवासी कचनी बेलाहवा टोला ७५ साल से ज्यादा दिखने वाली वृद्ध महिला भी अनशन करते लोगों के साथ दिखी। उनकी आँखों में चमक थी उम्मीद की, जिसकी लड़खड़ाती जुबान भी इस बात की तस्दीक कर रही थी. यह दृश्य विचलित करता रहा मानो सवाल कर रही हो क्या इन आंखो को इंसाफ देखना नसीब होगा.
संजय नामदेव अध्यक्ष (उर्जांचल विस्थापित कामगार यूनियन) ने कहा कि कंपनी और राज्य सरकार ने जो अनुबंध किया है, उसके अनुसार आदर्श पुनर्वास नीति २००७ के तहत जो पात्र लोग हैं, उनको नौकरी दी जाए और जमीन का उचित मुवावजा दिया जाए.
शैलेन्द्र सिंह चौहान ( शिवशैनिक ठोको के प्रदेश संयोजक) ने कहा कि हम अपने साथियों का सहयोग मरते दम तक करेंगे. कलेक्टर साहेब के आने के बाद यदि न्याय नहीं मिला तो प्रदेश भर से हमारे संगठन के साथी साथ में यहां आ कर शांतिपूर्ण आन्दोलन करेंगे.
अनिल द्विवेदी (आप) ने कहा हिंडाल्को प्रबंधन ने जब जी आई सी से पंजीयन कराया था, तब उन्होंने अनुबंध किया था कि ५००० स्थानीय लोगों को रोजगार देंगे, जो नहीं पूरा हुआ है, यदि हिंडाल्को प्रबंधन प्रभावितों के साथ न्याय नहीं करती तो हम लोग शांतिपूर्ण रूप से आन्दोलन करने और न्यायालय जाने के लिए तैयार हैं.
विकास सिंह एस डी एम देवसर ने आमरण अनशन पर बैठे लोगों को लिखित रूप से आश्वाशन दिया कि कलेक्टर महोदय १७ जुलाई को ट्रेनिंग से वापस आ जाएंगे, उनके आने के दस दिन के बाद त्रिपक्षीय वार्ता (कंपनी जिला प्रशासन और विस्थापित) कराई जाएगी, जिसमें सभी मांगों पर विस्तृत रूप से चर्चा कर समस्या का निराकरण किया जाएगा.
अनशन पर बैठे नारायण दास विश्वकर्मा (विस्थापित) ने सभी शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा १२ दिन के अनशन में हम लोग प्रशासन के उपेक्षा को सहते रहे, कई साथी बीमार हुए, दो महिला तो गंभीर रूप से बीमार हो गईं. आज (27-6-15) त्रिपक्षीय वार्ता के लिखित आश्वासन के बाद अनशन खत्म हुआ. सब कुछ लुटा के बस यही उम्मीद बाकी है कि न्याय होगा.
अब्दुल रशीद


