पुस्तक अंश

जनसंख्या की रोजनीतिः फलहाल तथा कुछ सवाल

प्रभीर गंगोपाध्याय

अनुवाद: नूपुर विश्वास

सारणी- 8 में हम देख रहे हैं कि हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में मुसलमानों की वृद्धि दर असामान्य है। वास्तव में, 1961 में वहाँ मुसलमानों की कोई आबादी ही नहीं थी। 1971 में वहाँ 28 मुसलमान रहने लगे तो वृद्धि दर अनंत हो गई। सीमानाहीन। असाम। 17 जिलों में वृद्धि दर 100 से ज्यादा है। लेकिन उन जिलों में मुसलमानों की जनसंख्या बेहद कम है। कहीं भी कुल जनसंख्या का 3.3 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है। सर्फ़ दमन अपवाद है, जहाँ मुसलमान 11.24 प्रतिशत हैं। जिन जिलों में वृद्धि दर 50 से लेकर 99.9 प्रतिशत है, उन जिलों में भी मुसलमानों की जनसंख्या कुल जनसंख्या के दस फीसद से ज्यादा नहीं है, जो कि उस प्रतिशत 11.2 से कम है। अपवाद देवरीया (उत्तर प्रदेश), मुम्बई और पश्चिम कन्नड़ हैं। इन जिलों में मुसलमान 11.2 प्रतिशत से ज्यादा हैं।

दूसरी तरफ, जिन जिलों में मुसलमानों की संख्या काफी है, कहीं कहीं वे बहुत संख्या में हैं, उन सभी जिलों में मुसलमानों की वृद्धि दर और उस वृद्धि दर से कम है। कुछ जिलों में तो कुल जनसंख्या के अनुपात में मुसलिम जनसंख्या घट भी गई है। सारणी -9 में हम कुछ उदाहारण पर गौर करेंगे।