व्यंग्यकार विनोद शंकर शुक्ल को जलेस की श्रद्धांजलि
रायपुर, 16 दिसंबर। 'एक दौर में छत्तीसगढ़ में हिन्दी व्यंग्य लेखन के चार महत्वपूर्ण स्तंभ रहे : लतीफ़ घोंघी, प्रभाकर चौबे, त्रिभुवन पाण्डेय और विनोद शंकर शुक्ल, जिन्हें राष्ट्रीय ख्याति भी मिली. लतीफ़ घोंघी डेढ़ दशक पहले इस व्यंग्यायन को छोड़ गए थे, विगत दिनों विनोदशंकर शुक्ल के रूप में हमने दूसरे स्तंभ को खो दिया.’ वे एक सहृदयी मिलनसार और मृदुभाषी इन्सान थे. साहित्य के हर शोधार्थी को अपना पूरा सहयोग देते थे.’
उक्त उदगार छत्तीसगढ़ प्रदेश जनवादी लेखक संघ के उपाध्यक्ष व्यंग्यकार विनोद साव ने व्यक्त किए.
दुर्ग भिलाई के साहित्यकारों ने श्री शुक्ल के निधन को साहित्य के लिए एक गहरी क्षति निरुपित करते हुए अपनी विनम्र श्रद्धांजलि उन्हें अर्पित की.
जलेस के प्रदेश सचिव नासिर अहमद सिकंदर ने कहा कि ‘विनोद शंकर जी हमारे जलेस के ‘शरद जोशी स्मृति’ आयोजन से लंबे समय तक जुड़े रहे और हमें उनका मार्गदर्शन मिलता रहा.’
शायर मुमताज़ ने कहा कि ‘विनोद शंकर जी न केवल एक अच्छे लेखक थे बल्कि वे मंचों पर अपनी व्यंग्य रचनाओं का अच्छे से पाठ कर श्रोताओं को बांध लिया करते थे.’
व्यंग्यकार रवि श्रीवास्तव ने कहा कि ‘विनोदशंकर लेखन और जीवन में मेरे सहयात्री रहे. उनके लेखन में व्यंग्य की समृद्ध परम्परा की गूँज थी.’
प्रलेस भिलाई अध्यक्ष परमेश्वर वैष्णव ने कहा कि ‘वे हम सबके प्रिय मिलनसार मृदुभाषी लेखक थे उनके जाने से हम बहुत भाव विह्वल हैं ।
ललितकुमार वर्मा ने कहा कि ‘वे मेरे गुरु थे’।
कवि शरद कोकास ने कहा कि ‘वे हमारे समय के सकारात्मक सोच वाले चिंतनशील व्यंगकार थे। विश्वास नहीं होता कि वे नहीं रहे।
रंगकर्मी राकेश बम्बार्डे ने कहा कि ‘शुक्ल जी नाटकों को देखने में बड़ी रूचि लेते थे.