मैं 2013 में लिखा गया लेख

आडवाणी जी को नीतिशेखर के प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर तो संघ के ही हैं...

अमेलेंदु उपाध्याय

जनता दल (यूनाइटेड) के दो दिन चले राष्ट्रीय परिषद के अधिवेशन के बाद राष्ट्रीय जनता पार्टी की चिपरी तौरे पर मतभेद घटते दिख रहे हैं। जद(यू) द्वारा पार्टी राज्य के प्रमुख नेता नीतीश कुमार के संबंध के बाद भारतीय जनता पार्टी और जद(यू) में तनावनी दिख रही है। हालांकी राजग सहयोग और जद(यू) अध्यक्ष शरद यादव ने कहा है कि उनका भाजपा के साथ गठबंधन है और उनकी पार्टी का गठबंधन तोड़ने की पहल नहीं करेंगे। लेकिन दोनों दलों के बीच दिखाई देने वाली तनावनी एक प्रारायोजनित खेल है। जद(यू) और भाजपा के बीच जो संदर्भ हैं उसे दोनों ही दल 2014 के बाद जारी रखना चाहते हैं लेकिन बीच में 2014 ही दोनों के बीच एक उच्चापोह की स्थिति भी पैदाकर रहा है। भाजपा को लगता है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के कॉरपोरेट हिंदुत्व पर सवाल होगा और आशानी से दिल्ली पहुँच सकता है। लेकिन वह भी जानती है कि मोदी को आगे करने से उसे जहाँ लाब होगा वहीं भीहार में उसे जबर्दस्त घाटा होगा। अभी तो जद(यू) और भाजपा के बंधन के सामने लालू प्रसाद यादव का राष्ट्रीय जनता दल (राजद)