नालन्दा में साम्प्रदायिक हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के बर्बर पुलिसिया दमन के खिलाफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला फूंका

भागलपुर, 19 जुलाई। देश के विभिन्न हिस्सों में साम्प्रदायिक भीड़-हत्या (मॉब लिंचिंग) के विरोध और आतंकी हमले में मारे गए अमरनाथ यात्रियों को श्रद्धांजलि देने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री के गृह जिला नालन्दा के बिहारशरीफ में अल्पसंख्यकों व प्रगतिशील नागरिकों के द्वारा 17 जुलाई को किये गए 'अमन मार्च' के बर्बर पुलिस दमन के खिलाफ भागलपुर स्टेशन चौंक पर आज प्रतिवाद-प्रदर्शन और मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया।

इस मौके पर आयोजित नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए न्याय मंच के डॉ. मुकेश कुमार और सोशलिस्ट पार्टी -इंडिया के गौतम कुमार प्रीतम ने कहा कि नीतीश-लालू संघ मुक्त भारत बनाने एवं बीजेपी को शिकस्त देने का दावा कर रहे हैं और दूसरी तरफ राज्य सरकार की पुलिस साम्प्रदायिक हिंसा के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से बुलन्द हो रही आवाज को दबाने-कुचलने का भी काम कर रही है।

दोनों नेताओं ने कहा कि नीतीश-लालू राज में भी अल्पसंख्यक और दलित-वंचित सुरक्षित नहीं हैं। राज्य में दर्जनों साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुई हैं, किन्तु नीतीश-लालू राज में हमलावर छुट्टा घूम रहे हैं और पीड़ित इंसाफ से वंचित हो रहे हैं। मोदी-योगी राज और नीतीश-लालू राज में कोई फर्क नहीं रह गया है।

न्याय मंच के संतोष कुमार झा एवं परिधि के उदय ने कहा कि नालन्दा में शांतिपूर्ण-लोकतांत्रिक तरीके से अमन मार्च कर रहे दर्जनों लोगों को जेल में डाल दिया गया है, दर्जनों लोग बुरी तरह घायल हैं। दोनों वक्ताओं ने इसे जनता के लोकतांत्रिक अधिकार पर खुला हमला बताते हुए इसकी तीखी भर्त्सना की।

जनसंसद के रामानंद पासवान और न्याय मंच के सौरभ कुमार ने कहा कि नीतीश-लालू की सरकार साम्प्रदायिकता के खिलाफ लोकतांत्रिक आवाज का दमन कर संघ-भाजपा का रास्ता साफ कर रही है।

न्याय मंच के सोनम राव एवं संजीव कुमार ने नालन्दा की जेल में बंद किये गए प्रदर्शनकारियों की बिना शर्त रिहाई, लादे गए फर्जी मुकदमे की वापसी और दमन के दोषी पुलिस पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। इस मौके पर रिंकु यादव, शांति रमण, मोहम्मद दाऊद सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।