संघी फासीवादी मोदी सरकार के विरुद्ध ब्राम्पटन में प्रदर्शन, राष्ट्रपति को ज्ञापन पोस्ट से भेजा गया
संघी फासीवादी मोदी सरकार के विरुद्ध ब्राम्पटन में प्रदर्शन, राष्ट्रपति को ज्ञापन पोस्ट से भेजा गया
ब्राम्पटन (कनाडा) शनिवार नवंबर २१, सुबह से ही बर्फ और बारिश का मिला जुला दिन था आज, अपनी तैय्यारियों के साथ मैंने एक अदद छतरी भी कार में रख ली थी, मौके पर ठीक समय पर पहुँच गया था। रास्ते में वयोवृद्ध बीमार कामरेड गुरुदेव मट्टू को भी उठा साथ ले लिया। मौका था ब्रेम्पटन स्थित भारतीय पासपोर्ट दफ्तर के समक्ष फासीवादी मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन देने का।
इंडो कनेडियन वर्कर्स एसोसियशन ने सितम्बर माह के शुरू में ही यह करने का प्रस्ताव पारित किया था, तब तक प्रो कुलबर्गी, गोविन्द पानेसर की हत्याएं हो चुकी थी और देश में सांप्रदायिक उन्माद का वातावरण घर वापसी, लव जिहाद के चलते काफी ख़राब हो चुका था। माननीय पूर्व माकपा संसद मास्टर भगत राम ने भारतीय काउन्सिल को ईमेल लिख कर मिलने का समय माँगा था जिसपर एक संक्षिप्त उत्तर मिलने के बाद कोई बात आगे न बढ़ सकी। भारतीय सरकार के अधिकारी अपने मुखिया के अमेरिका आगमन सेंट जोस (कलिफोर्निया) की तैय्यारी में लगे थे, सो उन्होंने रंग में भंग पड़ने जैसा कोई पंगा न लेकर टरकाना ही उचित समझा। अक्टूबर तक देश के हालात काफी बिगड़ चुके थे और साहित्यकारों, इतिहासकारों, फिल्म उद्योग और विज्ञान क्षेत्र की बड़ी-बड़ी शख्सियतें अपने सम्मान वापस कर चुके थे। हमने बिना समय लिए प्रदर्शन और ज्ञापन देने का निर्णय लिया था और वह दिन आज का था।
कुछ मित्र संगठनों से बातचीत की गयी। उत्तर अमेरिका तर्कशील सोसाइटी, कलमा दा काफ़िला, पंजाबी सभ्याचार मंच, कनेडियन पंजाबी साहित्य सभा ने समर्थन और प्रदर्शन में भाग लेने का निश्चय किया।
निर्दिष्ट स्थान पर मेरे पहुँचने से पहले ही वहां कई साथी पहुँच चुके थे। ठीक १२:१० पर इस व्यापारिक परिसर की सर्दियों के सुस्त वातावरण में फासिस्ट मोदी मुर्दाबाद, बाबा गदरी जिंदाबाद, भगत सिंह, करतार सिंह सराभा जिंदाबाद, मोदी मोदी हो बर्बाद, साम्प्रदायिकता मुर्दाबाद,न हिंदू राष्ट्र न हिंदूस्थान-राज करे मजदूर किसान आदि जैसे नारों ने माहौल में गर्मी बरपा कर दी।
तर्कशील के बलदेव रहपा, कलमा दा काफिला से प्रोफेसर जागीर सिंह काहलो, कनेडियन पंजाबी साहित्य सभा से मलूक कहलो, तर्कशील नेता बरनाला, कम्युनिस्ट हर्पर्मिंदर गदरी, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी नेता चन्द्र दोज, पंजाबी सभ्याचार मंच के बलदेव सिंह सहदेव ने एक एक कर भारत में बढ़ रहे सांप्रदायिक खतरों पर अपनी चिंता जाहिर की और लगातार गहरे होते जा रहे अंधकार को वापस गदरी आन्दोलन खड़ा करके तोड़ने की जरुरत पर बल दिया। भगत सिंह के खानदानी कामरेड अमृत ढिल्लो और इंडो कनेडियन वर्कर्स एसोसिएशन के हरिंदर हुंदल ने भी इस मौके पर अपने विचार प्रकट किए। इस एक घंटे के विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम का संचालन इन पंक्तियों के लेखक ने किया।
पाँचों जन संगठनों ने इस एकजुटता को और मजबूत बना कर भविष्य में आर एस एस मोदी सरकार के खिलाफ सतत संघर्ष करने की जरुरत पर सहमति जताई।
ध्यान रहे इसी जगह गत अप्रेल में मोदी की कनाडा यात्रा के दौरान कुल पांच लोगों ने टोरंटो के बजाए ब्रेम्पटन में विरोध प्रदर्शन किया था आज के प्रदर्शन में पांच संगठनों के कोई चार दर्जन लोगों ने शिरकत की।
शमशाद इलाही शम्स


