संसद के मानसून सत्र के दौरान देश के 12 लाख बिजली कामगार और इंजीनियर एक दिन की हड़ताल के लिए तैयार
21 जुलाई से 13 अगस्त के बीच हो सकती है हड़ताल
इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2014 लोकसभा में लाया गया तो उसी दिन हड़ताल होगी
लखनऊ। बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लोईस एण्ड इंजीनियर्स के आह्वान पर देश के 12 लाख बिजली कामगार और इन्जीनियर संसद के मानसून सत्र के दौरान एक दिन की हड़ताल के लिए तैयार हैं।
आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, उप्ररराविप अभियंता संघ के अध्यक्ष आर के सिंह व महासचिव डी सी दीक्षित ने आज एकविज्ञप्ति में बताया कि नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लोईस एण्ड इंजीनियर्स की ओर से प्रधान मंत्री, केंद्रीय बिजली मंत्री, केंद्रीय श्रम मंत्री और सभी राज्यों के मुख्यमन्त्रियों को प्रेषित नोटिस में लिखा गया है कि लोकसभा में जिस दिन इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2014 प्रस्तुत किया जाएगा उसी दिन देश के तमाम बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और इंजीनियर एक दिन की हड़ताल / कार्य बहिष्कार और विरोध प्रदर्शन कर कर जन विरोधी बिल का प्रतिकार करेंगे।
नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लोईस एण्ड इंजीनियर्स की ओर से दिए गए नोटिस में आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, आल इंडिया फेडरेशन ऑफ़ पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स, आल इंडिया फेडरेशन ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज (ऐटक ), इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (सीटू ), इंडियन नेशनल इलेक्ट्रिसिटी वर्कर्स फेडरेशन (इन्टक ), आल इंडिया पावरमेन्स फेडरेशन और सभी राज्यों के कई स्वतन्त्र ट्रेड यूनियन संगठन सम्मिलित हैं।
नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लोईस एण्ड इंजीनियर्स की ओर से शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि बिल के विरोध में प्रधान मंत्री और सभी प्रांतों के मुख्यमंत्रियों को पहले ही पत्र भेजकर प्रभावी हस्तक्षेप करने की मांग की जा चुकी है कि बिल को जल्दबाजी में पारित न किया जाए और बिजली की बेहतरी हेतु बिजली इंजीनियरों, कर्मचारियों और बिजली उपभोक्ताओं की इस बारे में राय ली जाए किन्तु अत्यंत दुर्भाग्य का विषय है कि कर्मचारियों के विरोध को दरकिनार कर बिल को लोकसभा के एजेंडा में शामिल कर लिया गया है जिससे कर्मचारियों में भारी गुस्सा है। उन्होंने प्रस्तावित संशोधनों को जन विरोधी करार देते हुये कहा है कि संशोधन बिजली आपूर्ति के निजीकरण हेतु किया जा रहा है, जिसमें निजी घरानों के मुनाफे का खास ध्यान रखा गया है जबकि आम जनता पर टैरिफ में भारी वृद्धि का बोझ डालने की तैयारी हैं। उन्होंने बिल को जनता के साथ धोखा बताया।
श्री दुबे ने बताया कि 21 जुलाई से शुरू हो रहे लोक सभा के सत्र में इलेक्ट्रिसिटी बिल को एजेंडा में शामिल किया गया है अतः यह संभावना है कि बिल को सत्र के दौरान रखा जा सकता है। मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलने वाला है अतः देश भर में बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों को एलर्ट कर दिया गया है कि वे संसद के मानसून सत्र के दौरान एक दिन की हड़ताल / कार्य बहिष्कार के लिए पूरी तरह तैयार रहें और बिल रखे जाने वाले दिन हड़ताल कर अपना विरोध दर्ज़ करें।
बिल के विरोध में उन्होंने सात प्रमुख बिंदु उठाये। पहला यह कि 2019 तक सबको बिजली मुहैय्या कराने के लिए संशोधन बिल में क्या प्राविधान है और साढ़े पांच लाख करोड़ रु. से अधिक के कर्ज और घाटे में चल रही बिजली वितरण कम्पनियाँ इस संशोधन की किस धारा से घाटे से उबर पाएंगी और सबको बिजली देने का लक्ष्य कैसे पूरा होगा। दूसरा यह कि बिजली आपूर्ति के नए प्रायवेट लायसेंसी बिजली आपूर्ति करने में अपना मुनाफा देखते हुए सामान्य घरेलू उपभोक्ता और औदोगिक / वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के बीच भेदभाव करेंगे तो इससे निपटने का संशोधन बिल में क्या प्राविधान है। तीसरा यह कि प्रस्तावित संशोधन के बाद कहीं आम घरेलू उपभोक्ताओं को ही बिजली दरों में भारी वृद्धि का झटका तो नहीं झेलना पड़ेगा। चौथा यह कि जब निजी सप्लाई कम्पनियाँ मुनाफे का सौदा करेंगी तो सरकारी आपूर्ति कंपनी के पास केवल ग्रामीण, बीपीएल और कम राजस्व वाले उपभोक्ता ही बचेंगे तो ऐसे में सरकारी कंपनी और अधिक घाटे में चली जाएंगी, परिणामतः गरीब उपभोक्ताओं के लिए बिजली मिलेगी ही नहीं। पांचवा यह कि सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा जैसे गैर परंपरागत क्षेत्र को प्रोत्साहन, छठा यह कि रेगुलेटरी कमीशन को स्वायतत्ता देने के लिए संशोधन बिल में क्या प्राविधान है और सातवां यह कि कहीं संशोधन बिल अनावश्यक कानूनी झगड़ों और मुकदमेबाजी को जन्म तो नहीं देगा।
बिजली कर्मचारी नेता ने कहा है कि एक ओर केन्द्र सरकार 2019 तक सबको बिजली मुहैय्या कराने की बात कह रही है, जिसके लिये 15.7 लाख करोड़ रू0 खर्च होने का अनुमान है जिसमें 5.27 लाख करोड़ रू0 वितरण कम्पनियों के घाटे की भरपाई के लिये है, दूसरी ओर वितरण व आपूर्ति को अलग कर आपूर्ति हेतु निजी घरानों को लाइसेन्स देने का संशोधन बिल लाया गया है जिससे वितरण कम्पनियों का घाटा और बढ़ेगा तो 2019 तक सबको बिजली देने का लक्ष्य कैसे पूरा हो सकेगा।
फेडरेशन ने कहा कि बिजली आपूर्ति में मोबाइल के सिम कार्ड की तरह आपूर्ति कर्ता कम्पनियां बदल सकने की बात करना जनता के साथ धोखा है क्योंकि भारत में बिजली का गम्भीर संकट है ओर कम्पटीशन सरप्लस स्थिति में होता है जब कि कमी की स्थिति में ब्लैक मार्केट होता है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सकरार की पहली प्राथमिकता वितरण कम्पनियों को घाटे से उबारना, ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू व सिंचाई के फीडर अलग करना, बिजली उत्पादन बढ़ाने हेतु कोयला व गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना, ट्रान्समिशन की क्षमता बढ़ाना होना चाहिए जिसके लिये इलेक्ट्रीसिटी (अमेण्डमेन्ट) बिल 2014 में क्या प्रविधान है यह स्पष्ट नहीं है।