संसद सदस्यों ने डॉ बलराम जाखड़ को श्रद्धासुमन अर्पित किए
नई दिल्ली, 23 अगस्त, 2016 : कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री, एस. एस. अहलुवालिया; राज्य सभा में विपक्ष के नेता, गुलाम नबी आज़ाद; तथा पूर्व उप प्रधान मंत्री और लोक सभा की आचार समिति के सभापति, लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में संसद सदस्यों ने आज लोक सभा के पूर्व अध्यक्ष, डॉ बलराम जाखड़ की जयंती के अवसर पर संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में उनके चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए ।

अनेक संसद सदस्यों, पूर्व संसद सदस्यों तथा लोक सभा के महासचिव, अनूप मिश्र ने भी डॉ जाखड़ को पुष्पांजलि अर्पित की ।
23 अगस्त, 1923 को पंजाब राज्य के फिरोजपुर जिले के पंजकोसी गाँव में जन्मे, डॉ बलराम जाखड़ को 22 जनवरी, 1980 को सातवीं लोक सभा के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया गया ।
डॉ जाखड़ को सातवीं लोक सभा में पहली बार निर्वाचित होने के तुरंत बाद अध्यक्ष पद पर आसीन होने के साथ संसद में अपने करियर की शुरुआत करने का गौरव प्राप्त है । 16 जनवरी, 1985 को उन्हें एक बार फिर सर्वसम्मति से आठवी लोक सभा के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया गया ।
दिसंबर, 1989 में जब डॉ जाखड़ ने अध्यक्ष पद छोड़ा तो वह स्वतंत्र भारत के एकमात्र ऐसे अध्यक्ष थे, जिन्हें लगातार दो लोक सभाओं का पूर्णकालिक अध्यक्ष रहने का दुर्लभ सम्मान प्राप्त था ।
कृषक से राजनीतिज्ञ बनने वाले जाखड़ लोक सभा अध्यक्ष के उच्च पद की कठिन चुनौतियों पर खरे उतरे और उन्होंने सभा का कार्य संचालन पूर्ण गरिमा, शालीनता और निष्पक्षता के साथ किया । दृढ़ होने के साथ ही वह सभा की भावनाओं के प्रति संवेदनशील रहते थे । उन्होंने सभा के निर्विघ्न और सुव्यवस्थित कार्य संचालन और इस प्रकार देश - विदेश में संसद की उत्कृष्ट छवि प्रस्तुत करने के कार्य में सदस्यों के सहयोग पर जोर दिया ।
1991 के आम चुनाव में बलराम जाखड़ एक बार फिर सीकर निर्वाचनक्षेत्र से लोक सभा के लिए निर्वाचित हुए और नई सरकार में केंद्रीय कृषि मंत्री बने । उन्होंने संसद और सरकार में रहकर कृषक समुदाय के हितों को सफलतापूर्वक सबके सामने रखा और उनकी रक्षा भी की ।
डॉ जाखड़ का 3 फरवरी, 2016 को निधन हो गया ।
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