सपा घमासान - यह बीजेपी के लिए अनुकूल माहौल है
सपा घमासान - यह बीजेपी के लिए अनुकूल माहौल है
सपा घमासान - यह बीजेपी के लिए अनुकूल माहौल है
सत्येंद्र पीएस
विधानसभा चुनाव मुलायम के नेतृत्व में लड़ा गया और जीत के बाद अखिलेश मुख्यमंत्री के रूप में थोप दिये गए।
अखिलेश के कथित सौम्य लोकप्रिय शहरी और सवर्ण को लुभावने चेहरे पर सिर्फ 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा गया और 1989 में सपा के सत्ता में आने के सबसे निचले पायदान पर नेताजी सिर्फ अपने कुनबे के साथ लोकसभा में बैठे हैं।
यही है अखिलेश की उपलब्धि का आंकड़ा।
सपा / बसपा को सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाले दल के रूप में देखा जाता है। जिस दिन सपा बसपा इस गफलत में पड़ीं कि उसका कोर वोटर कथित सवर्ण है, उस दिन ये दल मटियामेट हो जाएंगे।
दुर्भाग्य यह है कि बिहार में जिस तरह जदयू/ राजद ने खुद को दलितों पिछड़ों के दल के रूप में क्लियर स्टैंड लिया और दलित पिछड़े तबके का बेतहाशा प्यार पाया, वैसा स्टैंड यूपी में न तो सपा लेने को तैयार है न बसपा। इन दलों पर कुछ दूसरा ही भूत सवार है और यह बीजेपी के लिए अनुकूल माहौल है। केंद्र में बीजेपी की ढाई साल की नालायकी अगर यूपी चुनाव में हावी न हुई तो यूपी विधानसभा चुनाव में वह सत्ता के करीब पहुँच सकती है।
टाटा समूह ने सपा के लिए राह दिखाई है! मुलायम सिंह खुद सत्ता अपने हाथ में लें और सपा समूह का नया उत्तराधिकारी चुनने के लिए जनता को 4 माह का वक्त दें ?


