भाजपा के ‘मेक-इन-इण्डिया’ और तथाकथित ‘श्रमेव जयते’ का असल राज
दिल्‍ली, 2 फरवरी। भाजपा ने जिन संजय सिंह को विकासपुरी विधानसभा सीट से दिल्‍ली की विधानसभा में भिजवाने का फैसला किया है, उन संजय सिंह ने राजा हरिश्‍चन्‍द्र अस्‍पताल, नरेला में मजदूरों की कई लाख रुपये की मजदूरी नहीं चुकाई है। इतना ही नहीं मजदूरों को बकाया पेमेण्‍ट तो नहीं मिला उलटे न्‍यूनतम वेतन मांगने पर सात-आठ सालों से काम कर रहे दर्जनों मजदूरों को बदले की भावना से काम से निकाल दिया गया है और नई भर्ती कर दूसरे सफाई कामगारों को रख लिया है।
राजा हरिश्‍चन्‍द्र अस्‍पताल, नरेला में सफाईकर्मियों के ठेकेदार संजय सिंह विकासपुरी विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी हैं, उनके विषय में खबर है कि अनियमितताओं के चलते और कर्मचारियों द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद दिल्‍ली सफाई कर्मचारी आयोग द्वारा ठेकेदार संजय सिंह को ब्‍लैक लिस्‍ट कर दिया गया है। लेकिन ‘मेक-इन-इण्डिया’ और तथाकथित ‘श्रमेव जयते’ का राज असल में कैसा होगा इसकी झलक इस बात से मिल रही है कि दिल्‍ली के कई अस्‍पतालों में आज भी कर्मचारियों को नियुक्‍त करने का ठेका इन्‍हीं महाशय को मिल रहा है।
यह जानकारी देते हुए भाकपा(माले) की राज्य कमेटी के सदस्य गोविन्‍द उनियाल ने बताया कि उक्‍त ठेकेदार पर मजदूरों का करीब 10 लाख रू। तो पीएफ का ही बकाया बनता है और लाखों रूपये न्‍यूनतम मजदूरी के नहीं दिये गये हैं। उक्‍त अस्‍पताल के पीड़ित सफाई कर्मी पिछले अगस्‍त महीने से ही लगातार अस्‍पताल के सामने धरने पर बैठे हुए हैं। इन कामगारों में से अकबरी और प्रवीन आदि ने बताया कि उन्‍हें मात्र 3500 रुपये महीने, जो सरकारी रेट का आधा ही होता है, पर बिना कोई साप्‍ताहिक अवकाश दिये काम कराया जाता था, उनका पीएफ भी काटा जाता था लेकिन उसे कभी सरकारी खाते में जमा नहीं किया जाता था। फिर भी प्रशासन ने जानते हुए भी उसी ठेकेदार को तरजीह दी। यहां तक कि ब्‍लैक लिस्‍ट होने के बाद भी दूसरे नाम से कम्‍पनी बना कर उसी को रखा गया। कई अन्‍य हॉस्पिटल्‍स में भी इनका ठेका इसी तरह चल रहा है। यदि कोई कर्मचारी पूरी तरख्‍वाह मांगने की जुर्रत करे तो उसे तुरंत निकाल दिया जाता है। जबकि दिल्‍ली सफाई कर्मचारी आयोग ने भी हर साल ठेका का नवीनीकरण होने पर पुराने कर्मचारियों को ही बहाल रखने की अनुशंसा की थी।
इन सफाई कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई को दो-तीन साल से अनवरत रूप से चला रहे ऐक्‍टू नेता सुरेन्‍द्र पांचाल, जो अब नरेला से भाकपा(माले) के प्रत्‍याशी हैं, ने बताया कि पिछले आठ महीनों से राजा हरिश्‍चन्‍द्र अस्‍पताल के सफाई कर्मी दर-दर सरकारी विभागों और जनप्रतिनिधियों के पास चक्‍कर लगा रहे हैं, लेकिन झूठे आश्‍वासनों और भुखमरी के अलावा उन्‍हें कुछ भी हासिल नहीं हुआ। यहां तक कि बीच-बीच में धमकियां और अवहेलना भी झेलनी पड़ रही है। इनमें बड़ी संख्‍या महिला कामगारों की है, जिनकी आर्थिक हालत बहुत ज्‍यादा खराब हो चुकी है। उन्‍होंने बताया कि ठेकेदारों और प्रशासन की पूरी मिली भगत है और बिल्‍कुल ऐसे ही हालात दिल्‍ली के बाकी अस्‍पतालों व अन्‍य सरकारी संस्‍थानों में कार्यरत ठेका मजदूरों के हैं। उनका कहना है कि मोदी सरकार के आने के बाद हालात और भी दयनीय हो गये हैं, जिसके पीछे सरकार की श्रम विरोधी नीतियां और मजदूर अधिकारों पर बढ़े हमले हैं।
उक्‍त सफाई कर्मी तो आज भी दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, लेकिन उनके ठेकेदार अब विधानसभा मे जाने की तैयारी कर रहे हैं। सुरेन्‍द्र पांचाल ने कहा कि भाजपा द्वारा ऐसे ठेकेदारों को प्रत्‍याशी बनाये जाने से स्‍पष्‍ट हो रहा है कि भाजपा की सरकार बनने से मेहनतकशों के जीवन में अंधकार और बढ़ेगा तथा कॉरपोरेट स्‍वार्थों को ही पूरा किया जायेगा। उन्‍होंने आहृवान किया है कि ऐसे उम्‍मीदवारों को हर हाल में पराजित करना चाहिए।