समस्या सुन्नी नहीं, आईएसआईएस है
समस्या सुन्नी नहीं, आईएसआईएस है
उज्ज्वल भट्टाचार्या
कोलोन (जर्मनी )। जर्मनी में शायद सबसे अधिक यज़ीदी आप्रवासी कोलोन शहर में रहते हैं। कुछ मेरे मित्र भी हैं। आज दोपहर को फ़ोन आया कि इराक में उनकी हालत के बारे में एक सभा हो रही है, समय हो तो आ जाऊं। सभा में कोई पचास-साठ लोग थे। यज़ीदी समुदाय के लोग, जर्मन, कुछ विदेशी, जिनमें से मैं अकेला भारतीय।
मूलतः इराक के यज़ीदी पीड़ितों के साथ एकजुटता के लिये यह सभा थी। मुझे भी बोलने को कहा गया, मैंने मना कर दिया। कहा कि मैं सुनना और सीखना चाहता हूँ। एक युवती से बात हुई। वह आई टी स्पेशलिस्ट है, बंगलौर में एक साल की ट्रेनिंग कर चुकी है। मैंने इराक में अन्य समुदायों के साथ यज़ीदियों के संबंध के बारे में पूछा। उसने कहा - तुम्हारे मुल्क में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच जैसी दुश्मनी है, इराक में आबादी के बीच वैसी दुश्मनी कभी नहीं रही है। आज भी नहीं है। समस्या सुन्नी नहीं, आईएसआईएस है।
अपने एक दोस्त से मैंने अमरीकी बमबारी पर उसकी राय पूछी। उसने कहा - बाद में अगर विरोध करना हो, तो हम करेंगे। अभी तो इस बमबारी से हमारी जान बच रही है।
आपसी बातचीत में सभी सद्दाम का गुणगान कर रहे थे। मैं सद्दाम को हटाने के लिये अमरीकी हमले का विरोधी था, लेकिन सद्दाम के गुणगान सुनते हुए कुछ बेचैन सा महसूस कर रहा था।
मैंने लोगों से पूछा कि क्या आईएसआईएस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन की कोई योजना है ? हैरानी के साथ उन्होंने सवाल किया - आईएसआईएस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन से क्या फ़ायदा ? वह इज़रायल की तरह कोई राज्य है क्या ?
कोलोन में भी विहिप के लोग मिल जाते हैं। अभी चंद दिन पहले उनमें से एक ने शिकायत की थी कि मेरे जैसे लोग सिर्फ़ गज़ा की बात करते हैं, यज़ीदियों को भूल जाते हैं। सोचा था कि आज की सभा में वह दिख जाएंगे। लेकिन जैसा कि मैंने कहा, वहाँ मेरे सिवाय भारत का कोई नहीं था।


