जनान्दोलन से मुकाबला किया जायेगा
सरकार की किसान विरोधी नीतियों का
लोकतान्त्रिक आन्दोलनों की अनदेखी मंहगी पड़ेगी-परवेज
आइपीएफ संयोजक के उपवास का आठवाँ दिन

लखनऊ 17 जून। आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा है कि प्रदेश की सपा सरकार बिल्डरों और रियल स्टेट के कॉरपोरेट जगत के शिकंजें में है और उन्हीं के लाभ के लिये नीतियों का निर्माण कर रही है।
श्री सिंह प्रदेश में कानून के राज की स्थापना के लिये विधानसभा के सामने सीपीआईएम, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया), राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी समेत तमाम वाम-जनवादी ताकतों द्वारा समर्थित उपवास के आठवें दिन आयोजित सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि नेशनल हाईवे की मौजूदगी में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे और गंगा एक्सप्रेस वे जैसी योजनाओं की कतई जरूरत न होने के बाबजूद सरकार मात्र टाउनशिप और फार्म हाउस बनाकर बेहिसाब मुनाफा कमाने के लिये किसानों की उपजाऊ भूमि को छीनकर बिल्डरों, पूँजी घरानों के हवाले करना चाहती है। इसी प्रकार छोटे मझोले किसानों के प्रदेश में अखिलेश सरकार काँट्रैक्ट फार्मिंग की इजाजत देकर किसानी को कॉरपोरेट जगत के हाथों में देने में लगी है। सरकार की इस किसान विरोधी नीतियों का जनान्दोलन से मुकाबला किया जायेगा।

कॉरपोरेट और रियल स्टेट के बिल्डरों के मुनाफे के लिये बनायी जा रही नीतियों से बाज आने की नसीहत देते हुये अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार उ. प्र. विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भेजे कि जब तक देश में भूमि उपयोग की समग्र नीति ‘भूमि उपयोग आयोग‘ का गठन करके केन्द्र सरकार द्वारा नहीं बना दी जाती तब तक कॉरपोरेट हित के लिये सरकार या कॉरपोरेट द्वारा किसानों की जमीन की खरीद पर पूर्णतया प्रतिबन्ध लगाया जाये, साथ ही कॉँट्रैक्ट फार्मिंग पर रोक लगायें और कृषि के विकास के लिये कोऑपरेटिव खेती को प्रोत्साहित करें।

आज उपवास का समर्थन करने राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल के प्रदेश अध्यक्ष परवेज आफताब के नेत्त्व में उलेमा कौसिंल के दर्जनों कार्यकर्ता उपवास पर पहुँचे। राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल के प्रदेश अध्यक्ष परवेज आफताब ने सभा में कहा कि खालिद मुजाहिद की मौत और गिरफ्तारी पर दर्ज एफआईआर की विवेचना तत्काल शुरू कराने, अवैध खनन पर रोक लगाने, स्मारक घोटाले में लोकायुक्त की संस्तुतियों को स्वीकार कर इसके दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने व सीबीआई जाँच कराने और प्रदेश में किसान आयोग का गठन करने जैसे प्रदेश के ज्वलन्त सवालों पर अखिलेन्द्र के उपवास के आठ दिन बीत जाने के बाद भी सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी। प्रदेश में लोकतान्त्रिक आन्दोलनों की अवहेलना का खामियाजा सरकार को उठाना होगा। उन्होंने कहा कि अखिलेन्द्र जो सवाल उठा रहे हैं वह सरकार की खुद की धोषणाओं के दायरे में है। इसलिये अपनी घोषणाओं को पूरा करते हुये किसानों के कर्जो को माफ करना चाहिये और बकाए का भुगतान करना चाहिये, मनरेगा में सौ दिन काम और 15 दिन में मजदूरी के भुगतान की गारंटी करनी चाहिये, वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों और परम्परागत वनाश्रित जातियों को पुश्तैनी जमीन पर मालिकाना अधिकार देना चाहिये, किसानों व बुनकरों के कर्ज माफ करने चाहिये, उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार बिजली विभाग में काम करने वाले संविदा मजदूरों का नियमितिकरण करना चाहिये।

अखिलेन्द्र का मेडिकल बुलेटिन जारी करते हुये आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व आई.जी. एस. आर. दारापुरी ने बताया कि उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट हो रही है। उनके पेशाब में कीटोन और प्रोटीन का आना जारी है। उनका ब्लड प्रेशर और पल्स रेट भी बढ़ा हुआ है।

आज अपना समर्थन व्यक्त करते हुये राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव व पूर्व मन्त्री कॉ. कौशल किशोर, सीआईटीयू के प्रदेश अध्यक्ष आरएस बाजपेई, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल के सचिव लाल देवेन्द्र सिंह चौहान, सीपीएम के जिला सचिव कॉ. छोटेलाल पाल, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के महामन्त्री ओकांर सिंह, लालबहादुर सिंह, गोण्ड़ा के सहसंयोजक दयाराम गोस्वामी, महेश पाल, कमलेश सिंह एडवोकेट ने अखिलेन्द्र के उपवास स्थल पर आयोजित सभा को सम्बोधित किया।