सरकार ने समर्थन मूल्य बढ़कर किसानों से ज्यादा मुनाफाखोर कंपनियों पर मेहरबानी की
सरकार ने समर्थन मूल्य बढ़कर किसानों से ज्यादा मुनाफाखोर कंपनियों पर मेहरबानी की
सरकार ने समर्थन मूल्य बढ़कर किसानों से ज्यादा मुनाफाखोर कंपनियों पर मेहरबानी की
खबर है कि सरकार ने धान सहित कुछ कृषि फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ा दिया।
इस फैसले से धनी किसानों और फार्मरों को तो फायदा होना तय है, लेकिन छोटे-मझोले किसानों को इससे जितना लाभ होगा उसे लागत सामग्री की बढ़ी कीमतें ले-दे बराबर कर देंगी। उत्तरप्रदेश सरकार ने पिछले दिनों बिजली बिल में भारी बढ़ोतरी की है। खाद, बीज, कीटनाशक की कीमतें आसमान छू रही हैं।
दूसरे, छोटे-मझोले किसान कोई एक-दो फसल ही उगाते है, बाकी खाने की चीजें बाजार से खरीदते हैं। यानी धान में जो दो पैसे ज्यादा मिलेंगे, वह दलहन-तेलहन की खरीद से बराबर हो जाएगा।
किसानों में 85 फीसद छोटी जोत वाले हैं, जिनकी सबसे बड़ी समस्या लागत मूल्य का बढना है।सवाल है कि सरकार उन चीजों के कारोबार में लगी इजारेदार कम्पनियों पर लगाम क्यों नहीं लगाती?
इस फैसले से बहुलांश किसानों का कितना लाभ होगा यह संदिग्ध है, लेकिन खबर है कि इस बढ़ोतरी की घोषणा होते ही खाद, बीज, कीटनाशक, खाद्य प्रसंस्करण, अनाज व्यापार और सट्टेबाजी में लगी बड़ी कम्पनियों के शेयर में भारी उछाल आ गया।
यह सच्चाई है कि नवउदारवादी-साम्राज्यवादी नीतियों ने खेती को संकट में धकेल दिया है। इसी का नतीजा है कि किसान खेती छोड़ने पर मजबूर हैं।
किसानों की मेहनत चूसने वाले इन परजवी कंपनियों का मुनाफा तभी जारी रहेगा, कब किसान खेती करते रहेंगे। जब होस्ट मरता है, उससे पहले ही परजीवी मरते हैं। सरकार ने समर्थन मूल्य बढ़कर किसानों से ज्यादा इन मुनाफाखोर कंपनियों पर मेहरबानी की है।
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार हैं।


