सरकार या तो हमें जहर खिलाकर मार दे या फिर गोलियों से उड़ा दे। हम मर जाएंगे तभी चुप रहेंगे,
मुकेश कुमार
भागलपुर। “हमें ‘कुत्ता’ बनाकर रखा गया है। लेकिन अब हम कुत्ता बनकर नहीं रहेंगे। हम संगठित होकर संघर्ष करेंगे और अपना अधिकार लेकर रहेंगे।”
सफाईकर्मी मुढ़िया देवी के ये शब्द रविवार को बिहार के भागलपुर शहर में महादलित सफाईकर्मी अधिकार सम्मेलन की फिज़ाओं में गूंजी तो सबकी निगाहें उनपर जाकर ठहर गईं। सम्मेलन में आए सभी लोग एकदम शांत हो उठे और सबके चेहरे नई ताजगी से भर उठी।
मुढ़िया देवी यहीं नहीं रुकी, उन्होंने स्पष्ट शब्दों में सम्मेलन में आये हुए सफाईकर्मियों को ललकारते हुए कहा कि, ‘सरकार या तो हमें जहर खिलाकर मार दे या फिर गोलियों से उड़ा दे। हम मर जाएंगे तभी चुप रहेंगे, अन्यथा हम जिंदा रहेंगे तो सरकार और उसके पदाधिकारी को चैन से बैठने नहीं देंगे। हमलोग किसी कीमत पर गुलाम बनकर नहीं रहेंगे।’
मुढ़िया देवी ने उक्त बातें भागलपुर में चल रहे सफाईकर्मियों के ग्यारह दिनों से छह सूत्रीय मांगों पर दैनिक सफाईकर्मियों की हड़ताल को लेकर नगर आयुक्त अवनीश कुमार सिंह के जातिवादी-तानाशाही रुख और राज्य सरकार की उदासीनता के संदर्भ में कही।
दरअसल भागलपुर में पिछले 22 सितंबर से लगभग छह सौ दैनिक मजदूरी पर काम कर रहे ठेके पर बहाल सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल चल रही है। हड़ताली सफाईकर्मी अपने 19 माह के ईपीएफ की राशि का हिसाब-किताब मांग रहे हैं और अपनी दैनिक मजदूरी 208 रूपये प्रतिदिन से बढ़ाकर तत्काल दुगुना करने व सफाईकर्मियों को स्थायी नौकरी देने सहित अन्य मांगों पर डटे हैं। नगर आयुक्त और मेयर-डिप्टी मेयर सहित ज़्यादातर पार्षद उनकी जायज मांगों को अनसुना करते हुए बाहर से सफाईकर्मियों को लाकर उन्हें मुर्गा-मछली खिला ज्यादा मजदूरी देकर काम करवाने और हड़ताल को निष्प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बावजूद इसके शहर में सफाईकर्मियों की हड़ताल के कारण कूड़े का अंबार लगा हुआ है।

सफाईकर्मियों को ही कटघरे में खड़ा कर रहा ब्राह्मणवादी-पूंजीवादी मीडिया
ब्राह्मणवादी-पूंजीवादी मीडिया सफाईकर्मियों के हड़ताल की जायज वजहों पर पर्दा डालते हुए सफाई कराते हुए नगर आयुक्त की तस्वीरें छापकर हड़ताली सफाईकर्मियों को ही कटघरे में खड़ा कर रहा है।
सफाईकर्मियों की भविष्य निधि मद में खून-पसीने की कमाई से काटी गई करोड़ों रूपये की राशि की लूट मीडिया के लिए कोई सवाल नहीं है।
बताया जाता है कि इससे पूर्व भी रैमकी नामक एक निजी कंपनी सफाईकर्मियों से तीन वर्ष काम कराकर करोड़ों रूपये की ईपीएफ की राशि लेकर चंपत हो चुकी है। इसका आज तक सफाईकर्मियों को कोई इंसाफ नहीं मिला है। बल्कि इस बार भी पंच फाउंडेशन व शिवम जनास्वास्थ्य एजेंसी नामक कंपनी भी उसी लीक पर चल रही है और सफाईकर्मियों की मजदूरी से 19 महीने का ईपीएफ काट लेने के बाद भी उन्हें इसका कोई दस्तावेज़ देने के लिए तैयार नहीं है।

सफाईकर्मियों के नेताओं पर दो-दो फर्जी मुकदमे
इधर सफाईकर्मियों के नेता लड्डू हरि ने आरोप लगाया है कि नगर आयुक्त ने नियम-कानून को ताख पर रखकर दोनों कंपनियों को सफाई का ठेका आबंटित किया है। दोनों ठेका कंपनियां श्रम कार्यालय से अनुज्ञप्ति लिए बगैर काम कर रही हैं, जो कानून सम्मत नहीं है और किसी भी अनुज्ञप्ति विहीन कंपनी को ठेका आबंटित करना गैर कानूनी है। इस आधार पर सफाईकर्मी ठेका कंपनियों के साथ-साथ नगर आयुक्त पर भी एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
इन मांगों को लेकर सफाईकर्मियों के जुझारू संघर्ष को दबाने के लिए नगर आयुक्त सफाईकर्मियों के नेताओं पर अब तक दो-दो फर्जी मुकदमे लाद चुके हैं और अब तक लगभग 80 सफाईकर्मियों को हटाया जा चुका है। लेकिन आंदोलन थमने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है, नगर आयुक्त की ये कार्रवाई हड़ताली सफाईकर्मियों के हौसले को तोड़ पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
सफाईकर्मियों के सम्मेलन में सफाईकर्मियों के नेताओं ने यह सवाल उठाया है कि जब नगर आयुक्त हमारा नियोजनकर्त्ता ही नहीं है तो फिर वे किस हैसियत से हमें काम पर से हटा रहे हैं?

नगर आयुक्त के रवैये की जमकर आलोचना
हड़ताली सफाईकर्मियों ने नगर आयुक्त से नगर आयुक्त से अपने नियोजन से संबंधित दस्तावेज़ की भी मांग की है। जबकि सच यह है कि सफाईकर्मियों को उक्त ठेका कंपनियों द्वारा नियोजित किया गया है। सफाईकर्मियों को हटाने संबंधी नगर आयुक्त का आदेश श्रम क़ानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। सम्मेलन में नगर आयुक्त के इस रवैये की जमकर आलोचना हुई।
सफाईकर्मियों के नेता अमर हरि ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नगर आयुक्त की चोरी पकड़ा गई है इसलिए वे अपना आपा खो रहे हैं और जो जनप्रतिनिधि नगर आयुक्त और ठेका कंपनियों के इस गौरखधंधे में साथ दे रहे हैं, उन सब तक हमारी कमाई की लूट की राशि पहुंची है।
सम्मेलन में सफाईकर्मियों ने इस लूट के खिलाफ अपने अधिकार प्राप्ति हेतु निर्णायक संघर्ष का प्रस्ताव पारित करते हुए नए सिरे से इस पूरे मामले से राज्य के मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय व राज्य मानवाधिकार आयोग व राज्य के नगर विकास मंत्री तथा श्रम कल्याण मंत्री को अवगत कराते हुए इंसाफ की आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया है।

स्थायी नौकरी देने की मांग
दैनिक सफाईकर्मियों ने हड़ताल जारी रखते हुए अपनी मांगों को लेकर जिलाधिकारी के समक्ष 4 अक्तूबर से चरणबद्ध भूख हड़ताल पर जाने का भी प्रस्ताव सम्मेलन से पारित किया है। सफाईकर्मियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि सांसद-विधायक व सरकारी पदाधिकारियों का वेतन जब तीब्र गति से बढ़ता जा रहा है तब आखिर इतना अमानवीय-अपमानजनक काम करने वाले सफाईकर्मियों की मजदूरी बढ़ाने और स्थायी नौकरी देने से राज्य सरकार पीछे क्यों भाग रही है। सफाईकर्मियों ने जोरदार शब्दों में राज्यसरकार से स्थायी नौकरी देने की मांग भी उठाई है।
सम्मेलन को खगड़िया जिले के सफाईकर्मियों के नेता नवीन कुमार, न्याय मंच के डॉ. मुकेश कुमार एवं रिंकु, प्रगतिशील छात्र संगठन के नेता अंजनी, मानस कुमार, बसपा नेत्री संगीता देवी व गोवर्धन दास, छात्र संघर्ष समिति के संयोजक डॉ. अजीत कुमार ‘सोनू’ सहित दर्जनों लोगों ने संबोधित किया।
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