सरदार सरोवर क्षेत्र में रेत खनन पर संपूर्ण रोक जारी
उच्च न्यायालय का जाँच समूह करेगा अवैध खनन की जाँच
नई दिल्ली। बडवानी, धार, खरगोन और अलीराजपुर जिलों में नर्मदा किनारे, सरदार सरोवर डूब क्षेत्र में चल रही सभी रेत खदानों पर म.प्र. उच्च न्यायालय ने संपूर्ण रोक जारी रखी है।
न्यायमूर्ति राजेन्द्र मेनन व न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि सरदार सरोवर बांध के लिए भू-अर्जित जमीनों पर नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के द्वारा गुजरात की हकदारी बनी होते हुए, म.प्र. की खनिज विभाग की ओर से उन जमीनों को रेत खनन के लिए लीज पर देना या अवैध खनन को नही रोकना बिल्कुल ही गैर कानूनी है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की विज्ञप्ति में यह जानकारी देते हुए बताया गया है कि खण्डपीठ ने सभी शासकीय सस्थाओं को न केवल चेतावनी दी बल्कि फटकार लगाते हुए कहा कि रेत खनन का अवैध कारोबार तत्काल बंद होना चाहिए।
न्यायालय ने शासन से साफ शब्दों में कहा कि रेत खनन से बांध के डूब-क्षेत्र और जलाशय पर गंभीर असर होगा। ”क्या सरदार सरोवर के लिए इतने सारे लोगों को विस्थापित करने बाद, बांध को भी खत्म करेंगे क्या?” न्यायालय के इस सवाल पर जब म.प्र शासन के अधिवक्ता ने मौन साध लिया, तब मा. खण्डपीठ ने उन्हे स्पष्ट कह दिया – ”शासन या तो बांध बनाए या रेत खनन करे – दोनों संभव नही”। कुछ चंद राजनेताओं के सहारे यह अंधाधुंध खनन नहीं चलने देंगे।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से पैरवी करते हुए मेधा पाटकर ने न्यायालय को बताया कि 26 मार्च, 2015 को मुख्य न्यायाधीष के आदेश द्वारा मांगी गई जानकारी (गाँव-वार भू-अर्जन और लीज देने की दिनांक आदि) आज तक जिलाधीशों ने पूर्ण रूप से नहीं देने के कारण न्यायालय ने 6-5-2015 से पूरे डूब-क्षेत्र में रेत खनन पर रोक लगा दी। इसके बावजूद, कई गावों में, नदी से, सरदार सरोवर के डूब क्षेत्र में और जलग्रहण क्षेत्र में भी एक दिन में सैकडों टन रेत निकालने का अवैध कार्य चल रहा है। याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय को बड़े पैमाने पर चल रही ताजा रेत खनन – ट्रेक्टर्स, ट्रक्स, मशीनों के फोटो भी पेश किए।
6-5-2015 और 12-5-2015 के रोक आदेश के बाद, कल तीसरी बार न्यायपीठ ने, म.प्र. शासन को सख्त चेतवानी देते हुए, रेत खनन पर अपना रोक आदेश कायम रखा। इसके साथ यह भी जाहिर किया कि वे जल्द ही एक जाँच समूह गठित करके अवैध एवं विनाशकारी रेत खनन की पूरी जाँच करवाएंगे। आंदोलन ने सभी प्रभावित क्षेत्रों में जन सुनवाई की मांग भी की है। अगली सुनवाई 21, जुलाई, 2015 को नियत की गयी है।
यह जानकारी नर्मदा बचाओ आंदोलन की विज्ञप्ति में दी गई है।