सात साल बाद अचानक सच बोलना गुनाह हो गया !!!! IBN7 के एसो.एडिटर पद से बर्खास्त हुए पंकज श्रीवास्तव
सात साल बाद अचानक सच बोलना गुनाह हो गया !!!! IBN7 के एसो.एडिटर पद से बर्खास्त हुए पंकज श्रीवास्तव
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह की सरेआम एक संवाददाता को धमकाने का असर मीडिया हाउसेस में होने लगा है, चुन-चुनकर ऐसे पत्रकारों को नौकरियों से निकाला जा रहा है जो सरकार या मोदी की जरा भी आलोचना करते हों। चर्चा है कि भाजपा का मीडिया सेल ऐसे पत्रकारों की सुपारी दे रहा है और अब टीवी चैनलों की चर्चाओं में भी भाजपा प्रायोजित कथित पत्रकारों को भेजा जा रहा है। फिलहाल मोदी कंपनी का निशाना आईबीएन 7 के एसोसिएट एडिटर पंकज श्रीवास्तव हुए हैं, उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है।
पंकज श्रीवास्तव ने इस संबंध में अपनी फेसबुक टाइमलाइन पर पूरी घटना लिखी है, जो इस प्रकार है-
“और मैं आईबीएन 7 के एसो.एडिटर पद से बर्खास्त हुआ !!! सात साल बाद अचानक सच बोलना गुनाह हो गया !!!!
कल शाम आईबीएन 7 के डिप्टी मैनेजिंग एडिटर सुमित अवस्थी को दो मोबाइल संदेश भेजे। इरादा उन्हें बताना था कि चैनल केजरीवाल के खिलाफ पक्षपाती खबरें दिखा रहा है, जो पत्रकारिता के बुनियादी उसूलों के खिलाफ है। बतौर एसो.एडिटर संपादकीय बैठकों में भी यह बात उठाता रहता था, लेकिन हर तरफ से 'किरन का करिश्मा' दिखाने का निर्देश था। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष सतीश उपाध्याय पर बिजली मीटर लगाने को लेकर लगे आरोपों और उनकी कंपनी में उनके भाई उमेश उपाध्याय की भागीदारी के खुलासे के बाद हालात और खराब हो गये। उमेश उपाध्याय आईबीएन 7 के संपादकीय प्रमुख हैं। मेरी बेचैनी बढ़ रही थी। मैंने सुमित को यह सोचकर एसएमएस किया कि वे पहले इस कंपनी में रिपोर्टर बतौर काम कर चुके हैं, मेरी पीड़ा समझेंगे। लेकिन इसके डेढ़ घंटे मुझे तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया। नियमत: ऐसे मामलों में एक महीने का नोटिस और 'शो काॅज़' देना जरूरी है।
पिछले साल मुकेश अंबानी की कंपनी के नेटवर्क 18 के मालिक बनने के बाद 7 जुलाई को 'टाउन हाॅल' आयोजित किया गया था (आईबीएन 7 और सीएनएन आईबीएन के सभी कर्मचरियों की आम सभा ) तो मैंने कामकाज में आजादी का सवाल उठाया था। तब सार्वजनिक आश्वासन दिया गया था कि पत्रकारिता के पेशेगत मूल्यों को बरकरार रखा जाएगा। दुर्भाग्य से मैने इस पर यकीन कर लिया था।
बहरहाल मेरे सामने इस्तीफा देकर चुपचाप निकल जाने का विकल्प भी रखा गया था।यह भी कहा गया कि दूसरी जगह नौकरी दिलाने में मदद की जाएगी। लेकिन मैंने कानूनी लड़ाई का मन बनाया ताकि तय हो जाये कि मीडिया कंपनियाँ मनमाने तरीके से पत्रकारों को नहीं निकाल सकतीं ।
इस लड़ाई में मुझे आप सबका साथ चाहिये। नैतिक भी और भौतिक भी।बहुत दिनों बाद 'मुक्ति' को महसूस कर रहा हूं। लग रहा है कि इलाहाबाद विश्वविदयालय की युनिवर्सिटी रोड पर फिर मुठ्ठी ताने खड़ा हूँ।
मुझसे संपर्क का नंबर रहेगा—-09873014510”


