मानिकपुर (चित्रकूट) हज़ारों आदिवासियों एवं अन्य परम्परागत वनसमुदाय ने मानिकपुर के जारोमाफी गाँव में रानीपुर अभयारण्य के 3000 बीघा दख़ल कर एक हिस्से पर सामुदायिक वन लगाने का काम किया। उक्त भूमि ब्रिटिश काल के पहले से ही कोल आदिवासियों की भूमि थी जिसको आज़ादी के बाद वन विभाग द्वारा अतिक्रमित कर लिया गया व कोल आदिवासियों को उनकी पुश्तैनी भूमि से बेदखल कर दिया गया। अब जबकि वनाधिकार कानून 2006 देश में लागू है इस कानून से बल लेते हुये आदिवासियों द्वारा अपनी पुश्तैनी भूमि पर दख़ल लेने का सामूहिक कार्यक्रम बनाया व सैंकड़ों की संख्या मे आम, केला, नीम व अन्य उपयोगी पेड़ों एवं जड़ी बूटियों को लगाया। इस 20 बीघे के भूमि के टुकड़े को उपवन के तौर पर बनाने का संकल्प लिया गया व इस उपवन को संगठन की मरहूम महिला साथी भारतीजी ‘‘भारती स्मृति उपवन’’ के नाम से समर्पित किया गया। इस उपलक्ष्य में उत्तरप्रदेश के कई जिलों व कई राज्यों उ0प्र0 से सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, पीलीभीत, खीरी, सहारनपुर, ललितपुर, व बिहार व झारखंड़ के साथी उपस्थित हुये। इस मौके पर मानिकपुर के लोकसभा के प्रत्याशी श्यामाचरण गुप्ता भी मौजूद हुये जिन्होंने आदिवासियों की माँग को सम्मान करते हुये वनाधिकार कानून को लागू कराने का वादा किया।

इस कार्यक्रम को वनविभाग व पुलिस ने साजिश के तहत कार्यक्रम को विफल करने की नियत से 25 अगस्त को बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया ताकि यह बैठक न हो सके। लेकिन जब चारों तरफ से हजारो की संख्या में लोग पहुँचने लगे व लोकसभा के प्रत्याशी भी पहुँच गये तब पुलिस को मुँह की खानी पड़ी व उन्हें लौट कर जाना पड़ा। गाँव में थोड़ी देर सम्बोधित करते हुये अखिल भारतीय वनश्रमजीवी यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष संजय गर्ग ने प्रदेश सरकार को आड़े हाथो लिया व इस कानून को लागू करने की राजनैतिक इच्छा शक्ति पर प्रश्न उठाये, साथ ही इस कानून की प्रांसागिकता पर भी चर्चा की। इसके बाद श्यामाचरण गुप्ता ने भी इस संदर्भ में वनाधिकार कानून के समर्थन में अपनी बातों को रखा और वादा किया कि वे इस कानून को लागू करने के लिये स्वयं मुख्यमंत्री से बात करेंगे।

इसके बाद एक उत्सव के तहत हज़ारों की संख्या में महिलाए एवं पुरूष लाईन मे नारे लगाते हुये करीब एक किमी दूरी पर स्थित रानीपुर सेंचुरी की और चल पड़े। इस मौके पर पुलिस की हिम्मत नहीं हुयी कि व इस जनसैलाब को रोके। सेंचुरी के क्षेत्र में पहुँच कर ‘‘भारती स्मृति उपवन’’ का बोर्ड स्थापित किया गया, भूमि पूजन कर नारियल फोड़ा गया व बड़े पैमाने से इन सारे क्षेत्रों से महिलाओं द्वारा लाये गये पौधों को वनक्षेत्र में लगाया गया। ज्ञातव्य हो कि यह क्षेत्र सेंचुरी में जरूर है लेकिन यहाँ पर पेड़ पौधे कही पर भी नज़र नहीं आते। वनविभाग की मिलीभगत द्वारा माफियाओं द्वारा पूरे जंगल को बरबाद कर दिया गया है।

आम का वृक्ष लगाते हुये भारतीजी के भाई तपनजी

ने गीत गाते हुये इन पौधों को बेहद ही प्यार से बोया व वहाँ पर सभा भी की। साथ ही वनविभाग, दलालों व पुलिस को चेतावनी दी कि कोई भी इन पौधों को नष्ट न करें अगर ऐसा किया तो वनविभाग के इसकी सज़ा भुगतनी होगी व इसका जवाब लिया जायेगा। इस वृक्षारोपण से आदिवासियों में काफी साहस व जोश पैदा हुआ। उन्हें वनविभाग के उपर अपनी जीत का एहसास हुआ जोकि आज़ादी से लेकर अब तक उनका उत्पीड़न करते चले आ रहे हैं। इस वृक्षारोपण ने अन्य जिले से आए हुये लोगों का भी काफी साहस बढ़ाया जिन्हें लगा कि अब वे अपनी बल पर वनाधिकार कानून को लागू करवा सकेगें।

इसी कार्यक्रम को ज़ारी रखते हुये अगले दिन 26 अगस्त को हज़ारों की संख्या में आए हुये आदिवासियों द्वारा तहसील कर्वी का चक्का जाम कर दिया गया। सभी आदिवासी समुदाय सुबह ही 10 बजे स्टेशन पर इकटठा होगए व सभी लोग मातादयालजी कार्यकारीणी सदस्य अखिल भारतीय वनश्रमजीवी युनियन के नेतृत्व में रैली निकालते हुये कर्वी मेन चौक टैफिक चौराहे की तरफ निकल गये। चौराहे पर आकर आदिवासियों द्वारा चारों तरफ से रास्ता जाम कर दिया गया और अपनी मांगों को मनवाने के लिये अधिकारीयों के लोगों के बीच आने को कहा। तब उपजिलाधिकारी व सीओ मौके पर आये, इस तरह का प्रर्दशन देकर अधिकारीयों के हाथ पाँव फूल गये व उन्हें सभी बाते काफी तस्सली से सुननी पड़ी। मातादयाल ने नौ सूत्रीय ज्ञापन दिया जिसको अधिवक्ता रमेश शुक्ला ने पढ़ा। इस ज्ञापन में फर्जी मुकदमों को वापिस करना, वनाधिकार कानून को लागू करना, सामुदायिक अधिकारों को देना, जारो माफी पंचायत भवन से पीएसी कैम्प को हटाना, लघु वनोपज पर वनाधारित समुदाय का अधिकार देना आदि शामिल था।

इसके बाद यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष संजय गर्ग द्वारा उपजिलाधिकारी के समक्ष बड़े जोरदार तरीके से उन्होंने कानून की अनदेखी करने के लिये सपा सरकार को आड़े हाथों लिया व बताया कि फरवरी माह में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में वनाधिकार कानून को लेकर एक समीक्षा बैठक हुयी थी जिसमें इस कानून को जल्द से जल्द लागू करने के लिये सरकार ने वादा किया था लेकिन सरकार द्वारा आज तक यह वादा नहीं पूरा किया गया है जिसके चलते वनसमुदायों पर लगातार उत्पीड़न बढ़ता ही चला जा रहा है। आगामी लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा एक अहम मुददा होगा इसलिये सरकार इस कानून को गंभीरता से ले व इस पर अमल करते हुये आदिवासियों को उनके अधिकार दिलाये। यूनियन की उपमहासचिव रोमा द्वारा उपजिलाधिकारी से पूछा गया कि उपखंड स्तरीय समिति के अध्यक्ष होने के नाते उन्हेांने अब तक इस कानून को लागू करने में क्या कार्य किये हैं? इस पर उपजिलाधिकारी ने बताया कि उन्हें आये कुछ ही दिन हुये है व उन्हेांने कानून को नहीं पढ़ा है। इस पर प्रशासन को सम्बाधित करते हुये रोमा ने कहा कि यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि वन क्षेत्र में नियुक्त किये जाने वाले अधिकारी वनाधिकार कानून पढ़ कर आते ही नहीं जब कि जिन कानून व नियमों से मोटी कमाई व दलाली करने का मौका मिलता हो वह कानून सब अधिकारी अच्छी तरह से जानते हैं।

रोमा ने कहा कि जो भी अधिकारी इस कानून को नहीं जानता है उसे इस जिले में रहने का कोई भी अधिकार नहीं है। उपजिलाधिकारी को राज्य निगरानी समिति की विशेष आंमत्रित सदस्या होने के नाते उन्होंने कहा कि ज्ञापन तो मुख्यमंत्री तक पहुँचता रहेगा उससे पहले दो दिन के अन्दर वे मीटिंग बुलाकर वनाधिकार कानून की कर्वी तहसील के अन्दर समीक्षा करें व देखें कि वनाधिकार समितियाँ सही रूप से गठित हैं या नहीं अगर नहीं हैं तो फौरन पुरानी को रदद कर नई समितियों को गठित करने का आदेश दें। व साथ ही वनविभाग को निर्देशित करें कि दावों को दायर करने के लिये सभी वनाधिकार समितियों को महत्वपूर्ण दस्तावेज़ जैसे वर्किगं प्लान व गजैटियर उपलब्ध कराए। अगर यह काम दो दिन के अंदर नहीं होगा तो पुनः 15 दिन के अंदर सड़कों को जाम कर दिया जायेगा व वनाधिकार कानून को लागू करने के लिये लम्बा अभियान चलाया जायेगा।

इस सभा में यूनियन के काफी महत्वपूर्ण नेतागण शामिल थे जिसमें उपमहासचिव अशोक चैधरी, सोनभद्र से शोभा, लालती, लालमन, रमाशंकर, मिर्जापुर से राजकुमारी व गयाप्रसाद, चंदौली से धनपति व शिवकुमारी, खीरी से नबादा, फूलमती, पूनम, सबीना, ज्वाहर, रमाशंकर, रामचंद्र राणा, पीलीभीत से बहना व रामनाथ, बिहार कैमूर से बालकेश्वर व कमला एवं झाड़खंड से सनीचर अगरिया शामिल थे।