साम्प्रदायिकता के खिलाफ-कानून के राज के लिए
जन संघर्ष रैली
आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ)
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी
अखिल भारतीय फारवर्ड ब्लाक
20 नवम्बर 2013, ज्योतिबा फूले मैदान, चोक, लखनऊ

प्रिय साथियों,

आप देख रहे हैं कि देश व प्रदेश की सरकारें देशी-विदेशी कारपोरेट घरानों, बड़े पंूजीपतियों के पक्ष में खड़ी होकर जनविरोधी नीतियों को लागू करने में लगी हैं और जनता के बीच विभाजन और साम्प्रदायिक राजनीति को बढ़ाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में प्रदेश की वाम-जनवादी ताकतों ने जनता के सवालों पर प्रदेश में एकताबद्ध संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए आगामी 20 नवम्बर को लखनऊ में ‘जन संघर्ष रैली’ करने का निर्णय लिया है। आपसे अपील है कि प्रदेश में साम्प्रदायिकता के खिलाफ, कानून के राज की स्थापना और जनहितैषी नीतियों के लिए संघर्ष हेतु आयोजित होने वाली इस रैली में बड़ी संख्या में शिरकत करें और हर संभव सहयोग प्रदान करें।

रैली के मुद्दे

किसानों के हित में -

1. प्रदेश में कृषि योग्य उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगायी जाये और किसानों व भूमिहीनों के हितों की रक्षा करने वाली भूमि अधिग्रहण व भूमि उपयोग नीति बनायी जाय।

2़. माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप वनाधिकार समिति द्वारा स्वीकृत दावों को स्वीकार किया जाय और वन विभाग द्वारा लादे गए मुकदमों को तत्काल वापस लिया जाय। जंगल व ग्रामसभा की जमीन को भूमाफियाओं के कब्जे से मुक्त कराकर ग्रामीण गरीबों व दलित-आदिवासियों में वितरित किया जाय।

3. उत्तर प्रदेश सरकार अपने वायदे पर अमल करे और कर्ज माफी की घोषणा को ईमानदारी से लागू करे। किसानों के हर प्रकार के कर्ज को माफ किया जाय और कर्ज वसूली के लिए किसानों के उत्पीड़न पर कड़ाई से रोक लगायी जाये।

4. किसान आयोग का गठन हो और किसानों को कृषि लागत मूल्य आयोग की सिफारिश के अनुरूप फसल का लाभकारी मूल्य दिया जाय। किसानों की फसलों की खरीद और उसके भुगतान की गारंटी की जाय। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार गन्ना किसानों के बकाये का तुरन्त भुगतान किया जाये।

5. किसानों को सस्ते दर पर खाद, बीज, डीजल, बिजली आदि की व्यवस्था की जाय।

6. दलितों व भूमिहीनों के पट्टों पर उन्हें कब्जा दिलाया जाय और ऐसे पट्टों पर काबिज अवैध कब्जेदारों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जाय। ग्रामसभा की अतिरिक्त भूमि पर, उन भूमिहीनों व दलितों जिनके पास मकान नहीं हैं, उन्हें आवासीय पट्टे दिये जायें।

7. लखनऊ-आगरा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे और गंगा एक्सप्रेस वे जैसी योजनाओं को पूरी तरह से रद्द किया जाये।

8. प्रदेश में ठेका खेती और जेनेटिक सीड के इस्तेमाल पर रोक लगायी जाये।

रोजगार, उद्योग व मजदूरों के सम्बन्ध में -

1. रोजगार को संविधान में मौलिक अधिकार बनाने के लिए उ0प्र0 शासन विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भेजे।

2. सार्वजनिक क्षेत्रों, सरकारी सेवाओं व सभी स्तर के शिक्षा संस्थाओं में रिक्त पदों को तुरन्त भरा जाय।

3. बंद चीनी मिलों व औद्योगिक संस्थानों को तुरन्त चालू किया जाय।

4. सभी स्कीम वर्कर्स, आंगनवाड़ी, आशा, शिक्षा मित्रों व रसोइयों को रिजवी कमीशन की संस्तुति के अनुसार सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाय। प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी 11,000 रुपये निर्धारित की जाय और स्कीम वर्कर्स को 11,000 रुपये मासिक का भुगतान किया जाय।

5. उ0प्र0 के विभिन्न विभागों में लम्बे समय से एक ही जगह कार्यरत दिहाड़ी व ठेका मजदूरों को विनियमित किया जाय और जब तक यह न हो उन्हें सरकारी मजदूरों के समान वेतन और अधिकार दिये जायें।

6. अवैध खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगायी जाये और प्रदेश में जारी अवैध खनन की सीबीआई जांच करायी जाये।

7. बिजली के निजीकरण पर रोक लगायी जाये और बिजली दरों को बढ़ाने का फैसला तत्काल वापस लिया जाये।

प्रदेश की गरीब जनता के लिए -

1. मनरेगा में हर हाल में 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाय, रोजगार न देने की स्थिति में बेकारी भत्ता दिया जाय और बकाया मजदूरी का तुरन्त भुगतान किया जाय। मनरेगा जैसी योजना को शहरों में भी लागू की जाये।

2. सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करके जनता को दो रूपया प्रति किलो की दर से 35 किलो अनाज उपलब्ध कराया जाये।

3. प्रदेश में बुनकर तबाही के कगार पर हैं, उनके कर्ज माफ किये जायें। उन्हें मुफ्त में बिजली दी जाय और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की तरह अन्य सभी सुविधायें मुहैया करायी जायें।

4. शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सुविधाओं के क्षेत्र में निजीकरण पर रोक लगायी जाय और शिक्षा और स्वास्थ्य पर बजट आवंटन बढ़ाया जाय तथा ‘शिक्षा के अधिकार’ कानून का ईमानदारी से पालन किया जाय। स्ववित्तपोषित शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों को सरकारी अनुदान वाले महाविद्यालयों के शिक्षकों को मिलने वाले वेतन भत्ते आदि के समान सुविधायें दी जायें।

साम्प्रदायिकता के खिलाफ व अल्पसंख्यकों के अधिकार के बारे में-

1. साम्प्रदायिकता पर रोक लगाने के लिए कड़ा कानून बनाकर कड़ी कार्यवाही की जाय। साम्प्रदायिता के मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा की जाये।

2. मुजफ्फरनगर दंगों में जो लोग घरों से बेघर हुए हैं, उनके पुनर्वास की तत्काल व्यवस्था की जाये और मुजफ्फरनगर के साथ ही अखिलेश सरकार के शासनकाल में हुए दंगों की न्यायिक जांच करायी जाये और इसके लिए जवाबदेह नेताओं, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को दंडित किया जाय।

3. न्यायमूर्ति आर.डी. निमेष कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर एक्शन टेकन रिपोर्ट को घोषित किया जाये और खालिद मुजाहिद की पुलिस हिरासत में हुई मौत की पुलिस द्वारा विवेचना जल्द शुरू की जाये।

4. पिछड़े मुसलमानों का कोटा अन्य पिछड़े वर्ग से अलग किया जाय। धारा 341 में संशोधन कर दलित मुसलमानों व ईसाइयों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए प्रदेश सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर कंेद्र सरकार को भेजे। सच्चर कमेटी व रंगनाथ मिश्रा कमेटी की सिफारिशों को लागू किया जाय।

5. आतंकवाद के नाम पर गिरफ्तार बेकसूर अल्पसंख्यक युवकों के मुकदमों के निस्तारण के लिए विशेष अदालतों का गठन हो और जितनी जल्दी हो सके जो निर्दोष हों, उनकी रिहाई हो और जो लोग अदालत द्वारा निर्दोष करार देकर छूट गये हैं, उन सबके पुनर्वास की गारंटी की जाय और उन्हें क्षतिपूर्ति दी जाये।

6. प्रदेश में अल्पसंख्यक आयोग का तत्काल गठन किया जाये।

सामाजिक न्याय के सम्बन्ध में-

1. कोल जैसी आदिवासी जातियों को जनजाति का दर्जा दिया जाये। गोड़, खरवार जैसी आदिवासी का दर्जा पाई जातियों के लिए सुप्रीम कोर्ट और संसद की स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप केन्द्र व राज्य सरकार चुनाव में सीटें आरक्षित करे।

2. अति पिछड़ी जातियों को अन्य पिछड़े वर्ग में से अलग आरक्षण कोटा दिया जाय।

3. मौजूदा सरकार द्वारा बंद की गयी दलितों के उत्थान के लिए चल रही 23 योजनाओं को तत्काल चालू किया जाय और दलितों के उत्थान के लिए विशेष सब प्लान बनाया जाये। साथ ही एससी/एसटी कानून का कड़ाई से अनुपालन हो।

4. एससी/एसटी के कोटे के रिक्त सरकारी पदों को भरा जाय। निजी क्षेत्र में भी आरक्षण दिया जाये।

महिलाओं के सम्बन्ध में-

1. महिलाओं की हर हाल में सुरक्षा की गारंटी की जाये और उन पर जारी हिंसा के प्रति पुलिस को जवाबदेह बनाया जाये। उनके खिलाफ हुई हिंसा की तत्काल एफ0आई0आर0 दर्ज हो और महिला हिंसा व बलात्कार जैसे संवेदनशील सवालों की फास्ट टैªक कोर्ट द्वारा सुनवाई की जाय।

2. घरेलू कामगार महिलाओं के लिए राज्य वेलफेयर बोर्ड की स्थापना की जाये और महिलाओं को पुरूषों के बराबर वेतन का कड़ाई से अनुपालन कराया जाये।

3. माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार प्रदेश के सभी विभागों में ‘वूमेन सेल’ का तत्काल गठन किया जाय।

अन्य मुद्दे-

1. पुलिस सुधार योजना बनाकर लागू किया जाये।

2. सरकारी विभागों व सार्वजनिक क्षेत्रों में व्याप्त भ्रष्टाचार रोकने के लिए ठोस कार्यवाही की जाये।

3. बढ़ती महंगाई रोकने के लिए कालाबाजारी व जमाखोरी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाये और वायदा कारोबार पर रोक लगायी जाये।

आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ), 4 माल एवेन्यू, निकट सत्संग भवन, लखनऊ, मो0 09450153307 द्वारा जारी।