साम्प्रदायिकता भड़काने के आरोपी योगी आदित्यनाथ का नाम लेने पर पत्रकार महोदय की स्याही सूख जाती है
साम्प्रदायिकता भड़काने के आरोपी योगी आदित्यनाथ का नाम लेने पर पत्रकार महोदय की स्याही सूख जाती है
साम्प्रदायिकता भड़काने के आरोपी योगी आदित्यनाथ का नाम लेने पर पत्रकार महोदय की स्याही सूख जाती है
संलग्न खबर को गौर से पढ़िए। अगर इस मामूली विवाद का आरोपी कोई हिन्दू होता और आरएसएस से जुड़ा होता तो क्या पुलिस और मीडिया कट्टरपंथी बोलने की हिम्मत कर पाते.
पत्रकार महोदय ने पुलिस सूत्रों के हवाले से लिखा है कि आरोपी पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया नाम से एक संगठन चलता है जिसका काम साम्प्रदायिकता फैलाना है.
पत्रकार महोदय को सूत्रों नहीं बल्कि ठोस सुबूतों के आधार पर बजरंगदल, हिन्दू युवा वाहिनी जैसे संघ के अनेक संगठनों पर साम्प्रदायिकता फैलाने ही नहीं बल्कि आतंकी वारदातों के अंजाम देने के पुलिस रिकार्ड से तथ्य दिए जाएं तो क्या वो उन्हें कट्टरपंथी संगठन लिखने की हिम्मत कर पाएंगे.
ये घटना बताती है कि मामूली विवाद में मुस्लिम आरोपी के बहाने कैसे किसी संगठन को, व्यक्ति को आरोपित कर उसको न सिर्फ बदनाम किया जाता है बल्कि उसे गैरकानूनी घोषित करने की मुहिम पुलिस मीडिया में बैठे अपने स्लीपिंग मॉड्यूल के जरिए करवाती है. और एक संगठन का काम ही साम्प्रदायिकता फैलाना घोषित करती है.
योगी आदित्यनाथ पर साम्प्रदायिकता भड़काने का मुकदमा चल रहा है, उनका नाम असीमानंद ने भी लिया था. क्या ये पत्रकार महोदय उनके लिए इस भाषा का इस्तेमाल करने की हिम्मत रखते हैं???
राजीव यादव. लेखक स्वतंत्र पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता, ऑपरेशन अक्षरधाम के लेखक व राज्य प्रायोजित आतंकवाद के विशेषज्ञ हैं.


