सीबीआई जज लोया की संदिग्ध मौत की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो - समाजवादी जन परिषद की मांग
सीबीआई जज लोया की संदिग्ध मौत की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो - समाजवादी जन परिषद की मांग
सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में सुनवाई कर रहे सीबीआई जज बृजगोपाल लोया की मौत पर द कारवां पत्रिका ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें उनके परिजनों ने उनकी मृत्यु की संदेहास्पद परिस्थितियों पर सवाल उठाए, साथ ही उन्हें सोहराबुद्दीन मामले में अमित शाह के पक्ष में फैसला देने के लिए 100 करोड़ रुपये की रिश्वत देने के प्रस्ताव की बात भी कही।
समाजवादी जन परिषद ने सीबीआई जज लोया की संदिग्ध मौत की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।
परिषद ने कहा है कि एक जिम्मेदार राजनैतिक दल होने के नाते यह मानता है कि, देश के सत्तारूढ़ दल के अध्यक्ष और न्यायपालिका पर उठे इतने गंभीर आरोप होने के नाते इस मामले में एक निष्पक्ष जाँच लाज़मी है। कारवां पत्रिका व्दारा उठाए सवालों से जनता के मन में राजनीति और न्याय व्यवस्था, दोनों के प्रति गहरे सवाल उठ रहें है। राजनीति में सुचिता और न्याय व्यवस्था में आस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सरकार और न्यायपालिका इस मामले में स्वत: पहल कर मामले से सभी पहलुओं को जाँच के माध्यम से जनता के सामने लाएं। सजप ने इस मामले में स्थापित मीडिया और स्थापित राजनैतिक दलों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
सजप ने आज जारी एक विज्ञप्ति में बताया की द कारवां की इस रिपोर्ट में उनके परिजनों की ओर से कई सवाल उठाए गए हैं, जैसे-
• लोया की मौत के समय को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार मृत्यु का समय 1 दिसंबर 2014 को सुबह 6:15 बजे दर्ज है, जबकि परिजनों के मुताबिक उन्हें एक तारीख़ को सुबह 5 बजे फोन पर उनकी मृत्यु की सूचना दी गई थी।
• लोया की मौत दिल के दौरे से होना बताया गया, जबकि परिजनों ने उनके कपड़ों पर खून के धब्बे देखे थे।
• लोया के पिता के अनुसार उनके सिर पर चोट भी थी।
• परिवार को लोया का फोन मौत के कई दिन बाद लौटाया गया, जिसमें से डाटा डिलीट किया गया था।
• साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रवि भवन से सबसे नज़दीकी ऑटो स्टैंड की दूरी दो किलोमीटर है। ऐसे में आधी रात को ऑटो मिलना कैसे संभव हुआ।
• एक सवाल ईश्वर बहेटी नाम के आरएसएस कार्यकर्ता पर भी उठाया गया है। इसी कार्यकर्ता ने लोया की मौत के बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव ले जाने की जानकारी परिजनों को दी, साथ ही लोया का फोन भी परिवार को बहेटी ने ही लौटाया था।
• पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के हर पन्ने पर एक व्यक्ति के दस्तखत हैं, जिसके नीचे मृतक से संबंध मराठी में ‘चचेरा भाई’ लिखा है, लेकिन परिवार का कहना है कि परिवार में ऐसा कोई व्यक्ति ही नहीं है।
• रिपोर्ट कहती है कि लोया की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, तो फिर पोस्टमॉर्टम की ज़रूरत क्यों पड़ी?
सजप का मानना है कि, उपरोक्त सवालों के जवाब देना न्यायपालिका और सरकार की जवाबदारी है|


