लाल कृष्ण आडवाणी को आशंका है कि देश पर एक बार फिर से 'इमरजेंसी' का खतरा मंडरा रहा है।
जिन अलोकतांत्रिक-शक्तियों की तरफ लाल कृष्ण आडवाणी का इशारा है, उसका प्रतिनिधित्व इस समय "असभ्य मोदी सरकार" कर रही है। ये वही नरेंद्र मोदी हैं जिन्हें गुजरात दंगे को तीन महीने बाद भी नियंत्रित न कर पाने से खिन्न तत्कालीन प्रधान्मन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी गुजरात के मुख्यमंत्री पद से हटाने का मन बना चुके थे...लेकिन, बतौर गृहमंत्री व उप-प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के दबाव में श्री वाजपेयी को अपना फैसला टालना पड़ा।
इसके बाद, अभी हाल ही में मोदी द्वारा; सम्मानित भारत-रत्न वाजपेयी गुजरात दंगा प्रभावित इलाके का दौरा करने की बजाय अपने मन की बात 'कविता' में लिखने एक महीने के लिए अपने करोड़ों के बनाये होटल मनाली चले गए।
लाल कृष्ण आडवाणी दो-तीन बातों के लिए मोदी से खिन्न हो सकते है।
एक, मोदी ने वाजपेयी की तरह लाल कृष्ण आडवाणी को भी 'भारत-रत्न' से नहीं नवाजा।
दो, लाल कृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री न बन पाने की बार-बार टीस मार रही हो।
तीन, मोदी ने सरकार में आने के बाद लाल कृष्ण आडवाणी को तवज्जो देना बंद कर दिया...
अखिलेश चंद्र प्रभाकर
अखिलेश चंद्र प्रभाकर, निदेशक- तीसरी दुनिया का सामाजिक नेटवर्क्स

हिंदू राष्ट्र के फर्जी लोकतंत्र के किस्से में आपातकाल का मतलब क्या है?
टुकड़ों का सच झूठ ही होता है – आपातकाल की हकीकत
अडवाणी जी सम्भावना की बात नहीं, आपातकाल लग चुका है
आपातकाल कब खत्म हुआ जी? अपराधी फासिस्ट नस्ली सत्ता का नरसंहार कब थमा है जी?
राजनीति गोलबंद जनता के खिलाफ, आपातकाल से भी बुरा हाल और इसीलिए छुट्टा सांढ़ों का यह धमाल!
आपातकाल- सत्ता का चरित्र एक जैसा ही होता
बेशक, अँधेरा गाढ़ा होता जा रहा है- यह नवआपातकाल है
अघोषित तौर पर लगातार आपातकाल की चपेट में है भारतीय लोकतंत्र
भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए योग, शाखा और साधना अहम त्रिकोण, संघ परिवार का खुलासा