दीपक गुप्ता

दोस्तों बीते 18 मार्च को मारूति के 13 मजदूरों को आजीवन कारावास व 4 को 5 साल की सजा का फैसला न्यायालय द्वारा सुनाया गया। फैसले के बाद से ही पूरे क्षेत्र में मजदूरों में व्यापक गुस्सा है। जिसके विरोध में गुड़गांव सहित पूरे भारत में मजदूरों ने विरोध प्रदर्शनों को आयोजित किया है। विदेशों में भी इस फैसले के विरूद्ध कई देशों में मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन आयोजित किए हैं।

मारूति पर न्यायलय द्वारा दिया गया फैसला ये जाहिर करता है कि ये पूंजीपति वर्ग द्वारा सामूहिक तौर पर मजदूर वर्ग पर किया गया हमला है। ये पूरे मजदूर आंदोलन को एक क्रूर सबक सिखाने का प्रयास है। आने वाले समय में मजूदरों-मेहनतकशों पर ये हमले और तेज होगें। साथ ही हालिया प्रतिरोध भी ये दर्शाते हैं कि शासक वर्ग द्वारा तमाम कोशिशों के बावजूद संघर्ष को रोका नही जा सकता है।

ऐसा नही है कि ये हमले केवल मजदूरों पर हो रहे हैं। छात्रों-नौजवानों सहित हर एक तबके पर सरकार की क्रूर नीतियां हमला बोले हुए हैं। हमारे कैम्पसों में भी छात्रों के बोलने की आजादी को लगातार कुचला जा रहा है। जब मारूति के मजदूरों की आवाज को दबाया जा रहा है, पूंजीवादी मीडिया द्वारा उनके विरोध में प्रचार किया जा रहा है तो ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम मजदूरों की आवाजों को सुने। अपनी आवाजों को उनकी आवाजों के साथ मिलाएं। इसी उद्देश्य से इस सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है।

हम आशा करते हैं कि आप सभी साथी बड़ी संख्या में इसमें भागीदारी कर इसे सफल बनाएगें।