मजदूरों के साथ हो रही लूट-पाट, छीना-झपटी की वारदातों पर रोक लगाने, सुरक्षा के पुख्ता प्रबन्धों, पुलिस-प्रशासन की ओर से सुनवाई की गारण्टी, मालिकों द्वारा पहचान-पत्र और हाजिरी कार्ड बनाने आदि सुरक्षा अधिकारों के लिये सैंकड़ों मजदूरों-नौजवानों ने डी.सी. कार्यालय पर किया रोषपूर्ण प्रदर्शन

18 जून 2013, लुधियाना। आज यहाँ डी.सी. कार्यालय पर टेक्सटाइल-हौकारी कामगार यूनियन, कारखाना मजदूर यूनियन व नौजवान भारत सभा के नेतृत्व में सैंकड़ों मजदूरों, मेहनतकशों, नौजवानों ने रोषपूर्ण प्रदर्शन किया और शहर में हो रही लूट-पाट पर रोक लगाने के लिये पुख्ता प्रबन्ध करने के लिये माँग-पत्र सौंपा।

मजदूर-नौजवान संगठनों द्वारा सौंपे गये माँग-पत्र में कहा गया कि लूट-पाट का सबसे अधिक शिकार गरीब आबादी वाले इलाकों में रहने वाले मजदूर हो रहे हैं क्यों कि अपराधिक तत्वों द्वारा उन्हें अपना शिकार बनाना बहुत आसान होता है। जिन दिनों में मजदूरों को वेतन मिलता है उन दिनों में वारदातें काफी बढ़ जाती हैं। अब तक दर्जनों मजदूर इन वारदातों का शिकार बन चुके हैं लेकिन पुलिस-प्रशासन को मजदूरों की कोई फिक्र नहीं है। हालात इतने गम्भीर हैं कि पुलिस वाले तक ड्यूटी से वापिस कमरे जा रहे मजदूरों को डरा-धमकाकर पैसे छीन लेते हैं। लूट-पाट की रिपोर्ट लिखवाने गये मजदूरों को पुलिस वाले या तो गालियाँ देकर भगा देते हैं या रिपोर्ट लिखने के लिये रिश्वत माँगते हैं। मजदूर आबादी में इतना रोष है कि 12 जून को बहादुरके रोड इलाके के हजारों मजदूरों ने स्वय: स्फूर्त इकठ्ठे होकर रोष प्रदर्शन किया था। लेकिन इसके बाद भी प्रशासन ने मजदूरों की सुरक्षा के लिये पुख्ता प्रबन्ध नहीं किए। लूट-पाट की घटनाएँ और पुलिस का मजदूर विरोधी रवैया शहर का माहौल खराब कर रहे हैं।

हालात की गम्भीरता को देखते हुये डी.सी. लुधियाना से मजदूरों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबन्ध करने के लिये तुरन्त कार्रवाई करने की माँग की गई है। माँग-पत्र में लुधियाना प्रशासन के सामने यह माँगें रखी गई हैं कि मजदूरों की सुरक्षा के लिये रात के समय पुलिस गशत बढ़ाई जाये, सडक़ों-गलियों में रोशनी का पूरा प्रबन्ध किया जाये, पुलिस प्रशासन में मजदूरों की सुनवाई हो, पीड़ितों को प्रशासन की ओर से मुआवजा दिया जाये, वेतन वाले दिन मजदूरों को दिन रहते छुट्टी की जाये, वेतन 7 को और एडवांस 22 को मिलने की गारण्टी हो, सभी कारखाना मालिकों द्वारा मजदूरों के बैंक खाते खुलवाये जायें और मजदूरों की सहमती से उनका वेतन बैंक में जमा करवाया जाये, काम से घर लौटने वाले मजदूरों को पुलिस वालों द्वारा नाजायज परेशान किया जाना तुरन्त बन्द हो, कारखाना मालिकों द्वारा बिना किसी देरी के अपने मजदूरों के पहचान पत्र, हाजिरी कार्ड, हाजिरी रजिस्टर बनाए जायें तथा अन्य श्रम कानून लागू किए जायें, रात के समय छुट्टी करने वाले मजदूरों को घर पहुँचाने की जिम्मेवारी मालिक उठायें। मजदूर-नौजवान संगठनों ने आज का यह रोषपूर्ण प्रदर्शन करते हुये प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर माँगें न मानी गयीं तो संघर्ष और तेज किया जायेगा।

टेक्सटाइल-हौजरी कामगार यूनियन के अध्यक्ष राजविन्दर ने प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुये कहा कि सन् 2010 में घटित ढण्डारी काण्ड भी ऐसे ही हालात की वजह से हुआ था। लेकिन सारी गल्ती मजदूरों की निकाली गई थी। उन्होंने कहा कि लुधियाना के मजदूरों के साथ हो रही लूट-पाट की वारदातें बन्द कराने के लिये असंगठित, गैर-योजनाबद्ध व स्वय:स्फूर्त तौर पर भीड़ जुटाकर प्रशासन पर दबाव नहीं बनाया जा सकता। इसके लिये मजदूरों को संगठित ढंग से संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि आज का यह प्रदर्शन इसी संघर्ष की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को मजदूरों के एकताबद्ध-संगठित संघर्ष के आगे झुकना ही होगा। टेक्सटाइल हौकारी कामगार यूनियन की ओर से ताज मुहम्मद ने भी प्रदर्शन को सम्बोधित किया।

कारखाना मजदूर यूनियन के संयोजक लखविन्दर ने कहा कि कारखाना मालिकों को सिर्फ अपने मुनाफे की चिन्ता है। वेतन वाले दिन भी मजदूरों को काफी रात के समय छुट्टी की जाती है। मजदूरों को घर पहुँचाने की जिम्मेदारी उठाने के लिये कारखाना मालिक तैयार नहीं हैं। जो कारखाना मालिक मजदूरों के पहचान-पत्र और हाजिरी कार्ड तक बनाकर नहीं देते, श्रम कानूनों की सरेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं उनसें मजदूरों की सुरक्षा के बारे में सोचने की कलपना भी कैसे की जा सकती है। मजदूर संगठनों के बार बार माँग किये जाने के बावजूद भी मजदूरों की सुरक्षा सम्बन्धी और अन्य श्रम कानून लागू करने के लिये मालिक तैयार नहीं हैं। श्रम विभाग मालिकों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। प्रशासन मालिकों का पूरा साथ दे रहा है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को अपनी सुरक्षा के पुख्ता प्रबन्ध करवाने के लिये और अन्य सभी अधिकार हासिल करने के लिये, सरकार-प्रशासन व मालिकों द्वारा मजदूरों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ एक बड़ा आन्दोलन खड़ा करना होगा।

नौजवान भारत सभा के संयोजक छिन्दरपाल ने कहा कि मजदूरों के साथ हर जगह अन्याय हो रहा है। देश की सारी आर्थिक-राजनीतिक व्यवस्था ही मुनाफे, लूट-शोषण, अन्याय पर टिकी हुई है। मजदूरों का कल्याण इस व्यवस्था का मकसद ही नहीं है। यह लोकतन्त्र नहीं, लूटतन्त्र है। उन्होंने कहा कि अपने अधिकार खुद हासिल करने होंगे। ऐसा अपने अधिकारों के लिये चेतना हासिल करके एकताबद्ध संघर्ष के जरिए ही हो सकता है।

शहीद भगतसिंह विचार मंच की ओर से प्रदर्शन में पहुँचे प्रो. ए.के. मलेरी ने कहा कि प्रशासन की यह बुनियादी जिम्मेदारी है कि शहर वासियों को सुरक्षा मुहैया करवाये। लेकिन प्रशासन यह जिम्मेदारी नहीं निभा रहा। पुलिस का चोर-गुण्डों-बदमाशों के साथ गठबन्धन छिपा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि मजदूर-नौजवान संगठनों द्वारा मजदूरों की सुरक्षा के प्रबन्धों के लिये प्रशासन के खिलाफ संघर्ष का झण्डा बुलन्द करना स्वागतयोग्य कदम है और इस संघर्ष के यकीनन साकारात्मक नतीजे निकलेंगे।