सोनी सोरी के चेहरे पर तेजाब फेंक दी जाती है और पार्श्व से भारत माता के नारे की आवाज सुनाई देती है
सोनी सोरी के चेहरे पर तेजाब फेंक दी जाती है और पार्श्व से भारत माता के नारे की आवाज सुनाई देती है
भय से भरा घिनावन समय है यह। लोगों में भय है लेकिन बौखलाहट भी है।
सोनी सोरी के चेहरे पर तेजाब फेंक दी जाती है और पार्श्व से भारत माता के नारे की आवाज सुनाई देती है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छत्तीसगढ़ आने के ठीक पहले की रात की बात है।
भय से भरा घिनावन समय है यह। लोगों में भय है लेकिन बौखलाहट भी है। यही बौखलाहट उम्मीद है।
भय मेरे अंदर भी काम कर रहा था। रांची में जो घटना घटी थी उसके बाद अंदर से मन हिल गया था। सोचा छत्तीसगढ़ जाने की योजना रद्द कर दूं। सियाराम शर्मा को फोन भी कर दिया उन्होंने हामी भी भर दी, लेकिन सुबह लगा कि अगर डर से नहीं गया तो जीवन भर खुद को माफ नहीं कर पाऊंगा। सुबह फोन कर के कह दिया कि आ रहा हूं, लेकिन भय भिलाई में भी था। बैनर पर 'कविता : १६ मई के बाद' नहीं लिखा था, हालांकि सब कुछ वैसे ही हुआ जैसा कि लिखे रहने पर होता। करीब बीस कवियों ने कविता पाठ किया और उपस्थिति 60 के करीब थी।
इस आयोजन से पहले एकल कविता पाठ के लिये सियाराम शर्मा मुझे अपने कॉलेज ले गए थे। भय वहां भी था।
भय रायगढ़ में भी था जो सभी का अकेले अकेले पीछा कर रहा था। यहां बैनर में 'कविता : १६ मई के बाद' तो लिखा था लेकिन टाउन हॉल में करने की जगह जहां पहले करने की उनकी योजना थी, तुलनात्मक रूप से सुरक्षित जगह पर किया गया। दोनों ही जगहों पर बाद में यह महसूस किया लोगों ने कि भय से निजात पाना है तो अभिव्यक्ति के खतरे उठाने ही होंगे।


